रिपोर्ट में कहा गया है कि वन विभाग ने न तो इसरो के अध्ययन का ही संज्ञान लिया और न ही अपनी तरफ से ही संभावित गलियारों की पहचान के लिए कोई अध्ययन किया। इसके चलते पहचाने गए गलियारे बलराम अंबाजी और जेसोर अभयारण्यों के लिए अधिसूचित पर्यावरण के दृष्टिकोण से संवेदनशील क्षेत्रों में पूरी तरह से शामिल नहीं किए गए।
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने खामियों और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की ओर से किए गए वैज्ञानिक अध्ययन के निष्कर्षों का संज्ञान नहीं लेने के लिए गुजरात के वन विभाग को फटकार लगाई है। इसरो ने राज्य में संभावित वन्यजीव गलियारों में जंगली जानवरों के रहने वाले स्थानों को लेकर सुधार की सिफारिश की थी। यह रिपोर्ट शनिवार को राज्य विधानसभा के पटल पर रखी गई।
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गुजरात में वन्यजीव अभयारण्यों की सुरक्षा, संरक्षण और प्रबंधन का निष्पादन लेखा परीक्षा शीर्षक वाली कैग की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इसरो ने 2014 से 2017 के दौरान किए गए अपने अध्ययन में राज्य में 12 वन्यजीव गलियारों की पहचान की थी। संगठन ने इन गलियारों में वन्यजीवों के रहने लायक सुविधाएं विकसित करने की सिफारिश के साथ अपनी रिपोर्ट वन विभाग के साथ भी साझा की थी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि वन विभाग ने न तो इसरो के अध्ययन का ही संज्ञान लिया और न ही अपनी तरफ से ही संभावित गलियारों की पहचान के लिए कोई अध्ययन किया। इसके चलते पहचाने गए गलियारे बलराम अंबाजी और जेसोर अभयारण्यों के लिए अधिसूचित पर्यावरण के दृष्टिकोण से संवेदनशील क्षेत्रों में पूरी तरह से शामिल नहीं किए गए।