यह घबराहट इसलिए भी बढ़ रही है क्योंकि भाजपा ने कुछ दिनों के लिए अपना मुख्यालय गुजरात शिफ्ट कर लिया है। अशोक रोड पर सन्नाटा पसरा है और
अमित शाह भी लगातार राज्य में ही कैंप कर रहे हैं। हालांकि पार्टी के गुजरात आईटी सेल के प्रमुख रोहन गुप्ता और बड़ौदा से कांग्रेस के नेता हरेश मलानी दोनों का मानना है कि भाजपा का अंतिम अ हिन्दू-मुसलमान के नाम पर चुनाव का ध्रुवीकरण कराना है।
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हरेश मलानी का कहना है कि प्रधानमंत्री ने 27 नवंबर से गुजरात की अस्मिता का रंग देना शुरू किया है, लेकिन मुझे नहीं लग रहा है कि जनता इस झांसे में आएगी। क्योंकि प्रधानमंत्री ने 2012 के विधानसभा चुनाव में गुजरात की अस्मिता के साथ-साथ खुद को भावी प्रधानमंत्री के रूप में प्रस्तुत करने का दांव अजमा लिया था। मोदी प्रधानमंत्री बन भी गए अब आखिर इससे आगे क्या?
वहीं रोहन गुप्ता का कहना है कि भाजपा गुजरात अस्मिता और प्रधानमंत्री के चेहरे का दांव न चलने की दशा में सांप्रदायिकता का कार्ड जरूर खेलेगी। हालांकि गुप्ता का कहना है कि भाजपा ने कुछ दिनों से इसका फ्लेवर देना शुरू किया है, लेकिन जमीन पर इसका असर नहीं दिख रहा है।
रोहन का कहना है कि जिस तरह से विकास के मुद्दे पर भाजपा खुलकर सामने नहीं आ रही है, वहीं कांग्रेस ने विकास, सामाजिक गठजोड़, भ्रष्टाचार, नोटबंदी, जीएसटी और प्रधानमंत्री की आर्थिक नीतियों पर हमला तेज कर दिया किया है। कांग्रेस आईटीसेल के प्रभारी का कहना है कि इसका असर भी दिखने लगा है।