कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि 29 नवंबर को सोमनाथ मंदिर में राहुल गांधी के जाने के बाद भाजपा के हाथ बड़ा मुद्दा लग गया था। कांग्रेस पार्टी के एक महासचिव के अनुसार भाजपा का प्रोपगैंडा फैलाने में कोई जवाब नहीं है। अपनी आदत के अनुरूप सत्ता पक्ष ने गुजरात में एक बार फिर सांप्रदायिक कार्ड खेलने की जोरदार कोशिश की, लेकिन गुजरात की जनता ने उसे नाकाम कर दिया।
गुजरातियों की समझदारी के चलते 30 नवंबर की सुबह तक भाजपा अपने मकसद में नाकाम हो गई। सूत्र के मुताबिक कई दशक बाद पहली बार ऐसा हुआ है, जब भाजपा हिंदुत्व और गुजरात की अस्मिता जैसे तमाम दांव आजमा रही है, लेकिन अभी तक उसके एजेंडे नहीं चल पा रहे हैं।
सूत्र बताते हैं कि बुधवार को दोपहर बाद से ही राहुल गांधी के नाम से सोमनाथ मंदिर के रजिस्टर में दर्ज विवरण की सुर्खियां बनने के बाद कांग्रेस मुख्यालय के माथे पर बल आ गए थे। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी भी इसको लेकर चिंतित नजर आई। बताते हैं इसको लेकर कांग्रेस अध्यक्ष शीला दीक्षित समेत अन्य से चर्चा भी की। दिल्ली से लेकर अहमदाबाद तक के पार्टी के रणनीतिकारों ने मोर्चा संभाल लिया। यह सब कवायद इसलिए हुई, क्योंकि कांग्रेस भाजपा को इस बार कोई भी मौका नहीं देना चाह रही थी।