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गुजरात चुनाव: मणिनगर को खल रही पीएम मोदी की कमी, नोटबंदी और GST से नाखुश

Tue, 05 Dec 2017 12:37 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला
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पीएम मोदी
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नोटबंदी और जीएसटी के कदम को पीएम नरेंद्र मोदी देश की अर्थव्यवस्था के लिए बेशक गेमचेंजर करार दे रहे हों लेकिन अहमदाबाद के मणिनगर की जनता इसे व्यापार और उद्योग के लिए घाटे का सौदा मान रही है। 
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गुजरात की चुनावी सरगर्मी के बीच अमर उजाला ने सूबे की हाईप्रोफाइल सीट मणिनगर का नब्ज टटोला तो पाया कि नोटबंदी और जीएसटी के कदम से अधिकांश लोग नाखुश हैं। मुख्यमंत्री रहते मोदी ने 2002 से 2014 तक इस सीट का प्रतिनिधित्व गुजरात विधानसभा में किया था।

यहां के लोगों का पीएम मोदी के साथ भावनात्मक लगाव है। कई ऐसे भी लोग हैं, जो पीएम मोदी को राजनीति करते हुए अरसे से देख रहे हैं। उन्हें अब पीएम मोदी की राज्य में कमी भी खल रही है। 
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मणिनगर के लोग मान रहे हैं कि मोदी के नोटंबदी और जीएसटी के कदम से उनके व्यापार और उद्योगों पर विपरीत असर पड़ा है। बावजूद उसके वे पीएम मोदी में भरोसा जताते हुए भाजपा का साथ देने की बात कर रहे हैं। साथ ही यह संभावना भी जता रहे हैं कि विधानसभा चुनाव में भाजपा की सीटें तो कम होंगी, लेकिन सरकार भाजपा की बनेगी।

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सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी नरेश भाई, जो अब व्यापार करने लगे हैं, का कहना है कि जीएसटी और नोटबंदी से नुकसान हुआ है। परेशानी से लोगों का बुरा हाल है। पीएम मोदी चर्चा किए बगैर ही फैसले थोप रहे हैं। उनके कदम बेशक देशहित में हैं, लेकिन वो लोगों को विश्वास में नहीं ले रहे हैं। बस फैसले थोपे जा रहे हैं।

हालांकि दबाव बढऩे पर कदम वापस भी ले रहे हैं। इससे बचना चाहिए। बावजूद वे चुनाव में भाजपा को समर्थन देने की बात करते हैं। यह हाल नरेश भाई का ही नहीं है। बल्कि कांकरीया झील में सुबह की सैर करने वाले अधिकांश लोग ऐसा ही मत जताते नजर आए। 
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150 सीट के दावे पर नहीं भरोसा 

rahul gandhi, pm modi
भाजपा के गढ़ कहे जाने वाले इस इलाके में लोग यहां से पार्टी की जीत की बात तो करते नजर आए, लेकिन भाजपा नेताओं के 150 पार का दावा उनके गले नहीं उतर रहा। विधानसभा चुनाव को कांटे का टक्कर बताते हुए परेश कहते हैं कि भाजपा की सरकार थोड़े बहुमत से बनेगी। इस बार कांग्रेस भी राज्य में बढिया चुनाव लड़ रही है।

देहात के इलाकों में भाजपा के खिलाफ माहौल ज्यादा खराब है। परेश कहते हैं जब तक मोदी मुख्यमंत्री थे, छोटे से लेकर बडे से बड़ा अधिकारी, चाक चौबंद रहा करते थे। लेकिन उनके जाने के बाद प्रशासन में बेहद ढि़लाई आई है। इसका असर कानून व्यवस्था पर भी दिखता है।

पार्टी के नेता भी बेपटरी हुए हैं। वो होते तो ऐसी स्थिति नहीं बनती...। मोदी सबको मिलते थे, व्यापारी हो या आम आदमी सबके साथ उनके व्यक्तिगत रिश्ते थे। उनको यहां अरसे से काम करते देखा है, मगर अब हालात बदले हुए हैं। हालांकि वे सब ठीक कर देंगे। 

पुराने दिन न आएं इसलिए भाजपा जरूरी 
जवाहर सिंह का कहना है कि शहर और सूबे में पुराने दिन न आएं इसलिए भाजपा का जीतना और उसकी सरकार बनना जरूरी है। वर्ष 1991 से 1995 के बीच के पुराने हालातों को याद करते हुए सिंह कहते हैं कि यहां सुरक्षा हिंदुओं में मुख्य मुद्दा है। भाजपा हट जाएगी तो माहौल वही हो जाएगा। इसलिए जीएसटी, नोटबंदी और तमाम सारी गलतियों और उनके दंश को भुलाते हुए हम भाजपा के साथ हैं।

प्रिंटिंग के व्यवसाय से जुड़े हिमेश भाई पांचाल का भी यही मानना है। मोदी के जीएसटी कदम को हिटलरशाही करार देते हुए पांचाल कहते हैं कि इससे काफी नुकसान हुआ है। लोगों के रोजगार छिने हैं। अपने ही उद्योग के हालातों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि पहले उनका कामकाज एक पार्ट टाइम के अकाउंटेंट से चल जाता था। उस पर महज 8 हजार खर्च करने पड़ते थे, मगर जीएसटी लागू होने के बाद फुल टाइम अकाउंटेंट रखना पड़ा है।

इससे उनका 10 हजार का खर्च बढ़ा है। ऐसे ही बेकार की कई झंझटें हैं, जिससे व्यवसाय में कठिनाई आ रही है। कपड़ा व्यापारी आकाश पटेल स्टेशन चौक पर अपनी दुकानदारी चलाते हैं। जीएसटी से वे भी परेशान हैं। लेकिन जब वोट देने की बात आती है तो वे खुल के मोदी के समर्थन में उतर आते हैं। 

युवा चेहरे ने बनाया मणिनगर के मुकाबले को रोचक
प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी के इस्तीफे से खाली हुई इस सीट पर भाजपा ने सुरेश पटेल को उपचुनाव में उतारा था। उन पर भरोसा कायम रखते हुए भाजपा ने एक बार फिर से उन्हें अपना उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस ने उनके मुकाबले युवा चेहरे पर भरोसा जताया है।

पार्टी ने अपने एक पुराने कार्यकर्ता की बेटी श्वेता ब्रह्मभट्ट को मौका दिया है। श्वेता आईआईएम की पासआउट हैं और लंदन से मास्टर्स की डिग्री लेकर लौटी हैं। अपने आकर्षक व्यक्तित्व से युवा वोटरों को वह लुभा भी रही हैं लेकिन देखने वाली बात यह होगी कि भाजपा के इस पुराने किले में वे कितना सेंध लगा पाती है।
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