कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे
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गुजरात चुनाव में आज दो दिग्गजों की भिड़ंत हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव के बिल्कुल आखिरी क्षणों में आतंकवाद का मुद्दा उछाल दिया तो कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भाजपा को रोजगार के मुद्दे पर घेरने की कोशिश की। दोनों शीर्ष नेताओं के इस रुख से यह साफ हो गया है कि अंतिम क्षणों में भाजपा पूरे चुनाव को राष्ट्रवाद, आतंकवाद और हिंदुत्व के मुद्दे पर ले जाने की कोशिश करेगी तो कांग्रेस उसे मूल मुद्दे से भटकने न देने की कोशिश करेगी। जनता दोनों में से किस मुद्दे पर अपनी मुहर लगाती है, इसका निर्णय तो आठ दिसंबर को ही पता चलेगा जब चुनाव के परिणाम सामने आएंगे।
पीएम नरेंद्र मोदी ने बिना किसी का नाम लिए कांग्रेस और उसके नेतृत्व को घेरने की कोशिश की कि दिल्ली में बाटला हाउस एनकाउंटर के बाद कांग्रेस के नेता रोने लगे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि सुरक्षा के बेहद गंभीर मुद्दे को भी वोट बैंक की राजनीति से जोड़कर देखती है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी ने तो आतंकवाद और कर्फ्यू देखा तक नहीं है। इसके दो ही दिन पहले अमित शाह ने भी एक जनसभा के दौरान 2002 के दंगों की याद दिलाई थी। भरूच में उन्होंने कहा कि 2002 में उन दंगों के दौरान नरेंद्र मोदी की सरकार ने कानून की सीमा में रहते हुए ऐसा काम किया जिससे आज तक गुजरात में दंगे नहीं हुए। माना जा रहा है कि इन बयानों के जरिए भाजपा अपने उस वोट बैंक को साधने की कोशिश कर रही है जो सांप्रदायिक ध्रुवीकरण में भाजपा के साथ आकर खड़ी हो जाती है।
कांग्रेस ने किया मूल मुद्दों पर वार
दिग्गज कांग्रेसी नेता मल्लिकार्जुन खरगे प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के इन बयानों के बाद भी टस से मस न हुए। वे उन्हीं मूल मुद्दों पर टिके रहे जिनके कारण गुजरात में लंबे समय तक कई आंदोलन देखे गए। पाटीदार आंदोलन से लेकर दलित और ओबीसी समुदाय के युवाओं ने पिछले समय में सरकारी नौकरियों में आरक्षण की मांग को लेकर काफी आक्रामक प्रदर्शन किया था। 2017 के गुजरात विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को इसका लाभ भी मिला था। खरगे ने युवाओं की उसी नब्ज को दुबारा दबाया और कहा कि भाजपा ने गुजरात को 20 लाख नौकरियां देने का वादा किया था, उसे उस वादे का हिसाब देना चाहिए।
कांग्रेस के अध्यक्ष चुने जाने के बाद पहली बड़ी परीक्षा से गुजर रहे मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने 20 लाख नौकरियों के स्थान पर केवल 1278 नौकरियां दी हैं। राज्य के 16 जिलों में एक भी नौकरी नहीं दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने देश के युवाओं को हर साल दो करोड़ नौकरियां देने का वादा किया था, लेकिन यह जुमला साबित हुआ। उन्होंने कहा कि देश को काम करने वाली सरकार की जरूरत है, जुमले सुनाने वाली सरकार की नहीं।
सही संदेश मिले तो गड़बड़ा सकता है भाजपा का गणित
गुजरात की राजनीति के जानकार अश्विनी पांडे ने अमर उजाला से कहा कि गुजरात के युवाओं में नौकरियों को लेकर सरकार के प्रति काफी नाराजगी है। राज्य के जिन ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में कांग्रेस की पकड़ मजबूत है, उन इलाकों में यह मुद्दा ज्यादा गंभीर है। यह चुनाव का अंतिम क्षण है। यदि कांग्रेस कार्यकर्ता मल्लिकार्जुन खरगे के इस बयान को मजबूती के साथ युवाओं के पास पहुंचा सकेंगे तो इससे उसके पक्ष में परिणाम बेहतर हो सकता है।