नरेन्द्र मोदी की धुआंधार रैलियों से पहले राहुल गांधी ने जिस पोरबंदर से इस बार का अपना चुनावी अभियान शुरू किया, वहां भाजपा के मौजूदा विधायक और इस बार के उम्मीदवार बाबू बोखिरिया से पोरबंदर के व्यापारी और सराफा कारोबारी खास खुश नहीं हैं।
गांधी जी की जन्मस्थली कीर्ति मंदिर के पास गांधी चौक के इर्द गिर्द तमाम दुकानों से गुजरते हुए इस बात का एहसास हो जाता है। कीर्ति मंदिर के ठीक सामने एक सराफा दुकानदार ने तो साफ कहा कि वो खुलकर कुछ नहीं बोल सकता लेकिन धंधा इतना मंदा है कि मुश्किल हो गई है।
वहीं पोरबंदर चैंबर ऑफ कॉमर्स के एक व्यवसायी हेमेन्द्र कोटेजा ने पहले तो नोटबंदी और जीएसटी की बुराइयां कीं, बाद में कहने लगे कि इसे समझने में लोगों को वक्त लगेगा और इससे बाद में देश को फायदा होगा। उसी तरह सराफा कारोबारी मनुभाई ज्वेलर्स के मालिक मनसुख लाल ने भी इसके फायदे गिनाए लेकिन उनके बेटे ने खुलकर कहा कि नोटबंदी और जीएसटी ने हमारी कमर तोड़ दी।
पोरबंदर चौपाटी पर रात का नजारा कुछ कुछ मुंबई के मरीन ड्राइव जैसा होता है। यहां चौपाटी के किनारे बने एक होटल के मालिक विक्रम ओडेडरा खुद भाजपा के निष्ठावान कार्यकर्ता हैं और अपने उम्मीदवार बाबू बोखिरिया को फिर से जिताने में दिन रात एक कर रहे हैं।
उनका मानना है कि बोखिरिया ने मंत्री रहते हुए पोरबंदर का विकास किया है और यहां उद्योग-व्यापार के साथ साथ बंदरगाहों के विकास को लेकर उन्होंने बहुत काम किया है।
गांधी की जन्मस्थली कीर्ति मंदिर के मैनेजर खुद को सियासत से दूर मानते हैं, लेकिन बताते हैं कि यहां मंत्री भी आए और खुद मोदी जी भी आए, लेकिन कीर्ति मंदिर के विकास के लिए मिलने वाले फंड को कोई बढ़ाता नहीं, हमें इतना कम फंड मिलता है कि वेतन तक देना मुश्किल है। कई बार मांग की गई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
2012 में यहां बोखिरिया ने कांग्रेस के उम्मीदवार अर्जुन मोढवाडिया को 17 हजार वोटों से हराया था। मोढवाडिया यहां पहले दो बार विधायक रह चुके हैं और कांग्रेस के एक दमदार नेता माने जाते हैं। छवि भी साफ सुथरी है जबकि भाजपा उम्मीदवार बोखिरिया चूना पत्थर के अवैध खनन के मामले में आरोपी हैं और 2013 में एक साल जेल भी काट चुके हैं।
पोरबंदर में राहुल गांधी को लेकर धारणाएं बदली हैं, सब उन्हें एक अच्छा लड़का मानते हैं और चौपाटी के पास युवाओं से बात करते हुए यह बात बार बार सामने आती है कि भाजपा ने तो अपनी पूरी ताकत लगा दी है, केंद्र और राज्य के सभी मंत्री और बड़े नेता गुजरात में घूम रहे हैं, लेकिन राहुल अकेले ही इनसे मोर्चा ले रहे हैं। जाहिर है इस बार पोरबंदर की जंग दिलचस्प होने जा रही है।