गुजरात कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष हार्दिक पटेल ने गुरुवार को आरोप लगाया कि उनकी पार्टी की राज्य इकाई के नेता उन्हें परेशान कर रहे हैं और चाहते हैं कि वह पार्टी छोड़ दें। पटेल ने यह भी कहा कि हालांकि उन्होंने कई बार कांग्रेस नेता राहुल गांधी के सामने अपने उत्पीड़न का मुद्दा उठाया, लेकिन उनकी शिकायतों को दूर करने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की गई।
पटेल ने उस समय प्रसिद्धि हासिल की थी जब उन्होंने 2015 में गुजरात में पाटीदार समुदाय के अभियान का नेतृत्व किया था, जिसमें ओबीसी श्रेणी के तहत आरक्षण की मांग की गई थी। हालांकि, 2019 में कांग्रेस में शामिल होने के बाद उनकी लोकप्रियता कम हो गई क्योंकि उन्होंने पहले वादा किया था कि वह कभी भी राजनीति में प्रवेश नहीं करेंगे।
लोकसभा और प्ंचायत चुनावों में नहीं दिखा हार्दिक का असर
हालांकि 2017 के राज्य विधानसभा चुनावों में आरक्षण आंदोलन के कारण कांग्रेस को फायदा हुआ, लेकिन पटेल के शामिल होने के बाद 2019 के लोकसभा चुनावों या उसके बाद के नगरपालिका या पंचायत चुनावों में पाटीदार समुदाय ने पार्टी का समर्थन नहीं किया। पटेल ने कहा, मुझे इतना परेशान किया जा रहा है कि मुझे इसके बारे में बुरा लग रहा है। गुजरात कांग्रेस के नेता चाहते हैं कि मुझे पार्टी छोड़ देनी चाहिए।
हार्दिक बोले, बहुत दुखी हूं, राहुल ने भी नहीं की मदद
उन्होंने कहा, मैं बहुत दुखी हूं क्योंकि मैंने कई बार राहुल गांधी इसके बारे में बताया, लेकिन गुजरात कांग्रेस के नेताओं के खिलाफ उनकी ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है। 2022 के राज्य चुनावों से पहले खोडलधाम मंदिर ट्रस्ट के प्रमुख पाटीदार चेहरे नरेश पटेल को कांग्रेस में लाने की योजना ने हार्दिक को नाराज कर दिया है। वह मानते हैं कि अगर नरेश पटेल कांग्रेस पार्टी में शामिल होते हैं तो पाटीदार नेता के रूप में उनका दबदबा खत्म हो जाएगा।
नरेश पटेल का इस्तेमाल करना चाहती है कांग्रेस
पाटीदार नेता ने कहा, आपने 2017 में हार्दिक का इस्तेमाल किया, आप 2022 में नरेश भाई का इस्तेमाल करना चाहते हैं और 2027 में आप एक और पाटीदार नेता का इस्तेमाल करेंगे। आप हार्दिक का समर्थन और मजबूत क्यों नहीं करते? उन्हें नरेश भाई को लेना चाहिए, लेकिन क्या वे उसके साथ वैसा ही व्यवहार करेंगे जैसा उन्होंने मेरे साथ किया? हार्दिक ने कहा कि पार्टी की प्रदेश इकाई के कार्यकारी अध्यक्ष होने के बावजूद उन्हें कोई काम नहीं दिया गया है। मुझे महत्वपूर्ण बैठकों में शामिल होने के लिए नहीं बुलाया गया है या किसी निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बनाया गया है।