गुजरात का एक गांव ऐसा है, जहां राजनीतिक दलों व उनके प्रत्याशियों के चुनाव प्रचार पर रोक है। मतदान न करने वाले लोगों को 51 रुपये जुर्माना भरना पड़ता है। गांव में यह नियम 39 वर्षों से हैं। ग्रामीण जागरूक मतदाता हैं। 100 फीसदी मतदान सुनिश्चित करते हैं।
गांव में इंटरनेट और वाईफाई
राज समाधियाला गांव हाईटेक है। इंटरनेट व वाईफाई की सुविधा है। सीसीटीवी कैमरे व आरओ प्लांट भी लगे हैं। इससे ग्रामीणों का जीवन सुविधाजनक हो जाता है। इससे पड़ोस के ग्रामीण भी प्रभावित हैं।
लेडी डॉन संतोक बेन के बेटे का दावा, मेरा नाम काफी
गुजरात में सभी प्रत्याशी अपनी-अपनी वजहों से जीत के दावे कर रहे हैं। पोरबंदर की कुटियाना सीट पर लेडी डॉन रहीं संतोकबेन जडेजा के बेटे कांधल सपा के टिकट पर मैदान में हैं। उनका दावा है कि जीत के लिए उनका नाम ही काफी है। वे यहां से पिछले दो चुनाव भी एनसीपी के टिकट पर जीते थे। हालांकि राज्यसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी का समर्थन करने पर एनसीपी ने उन्हें अनुशासनहीनता के लिए पार्टी से निकाल दिया था।
राज्य में वोट बैंक न रखने वाली सपा के टिकट पर लड़ने के बारे में कांधल ने कहा कि 2012 में एनसीपी को भी गुजरात में कोई नहीं जानता था। कुटियाना सीट के मतदाता उनका परिवार है और वे पार्टी नहीं देखते, सिर्फ उनके नाम पर वोट करते हैं। उन्होंने बताया कि वे पिछले हफ्ते खुद ही एनसीपी छोड़ कर साइकिल पर सवार हुए क्योंकि एनसीपी के मना करने पर भी उन्होंने भाजपा के राज्यसभा प्रत्याशी को वोट दिया था। उनके अनुसार सपा से उनका पुराना नाता है, 1995 में उनके चाचा भी सपा की ओर से चुनाव लड़ चुके हैं।