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5 से 28% फीसदी होंगी जीएसटी दरें, जानें, क्या हुआ महंगा, क्या सस्ता

Fri, 04 Nov 2016 12:16 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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वस्तु और सेवा कर -जीएसटी- की दरों पर केंद्र और राज्यों के बीच सहमति बन गई है। जीएसटी प्रणाली के तहत देश में  5, 12, 18 और 28 फीसदी की चार दरें होंगी। 28 फीसदी वाले स्लैब में जो सामान आएंगे उन पर अलग से सेस भी लगाया जाएगा। हालांकि किस टैक्स रेट के स्लैब में कौन सी वस्तु आएगी, इस पर फैसला नहीं हुआ है और सेस पर भी फैसला नहीं हुआ है।
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लेकिन इतना तय है कि कई वस्तुओं पर लोगों को टैक्स में राहत मिलेगी। जाहिर है इससे आम लोगों को महंगाई में थोड़ी राहत मिल सकती है। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बृहस्पतिवार को यहां हुई जीएसटी काउंसिल की चौथी बैठक के बाद संवाददाताओं को बताया कि जीएसटी दरों पर सहमति बन गई है। जीएसटी काउंसिल ने सर्वसम्मति से जीएसटी के लिए 5 फीसदी, 12 फीसदी, 18 फीसदी  और 28 फीसदी की दरें तय की हैं। 12 फीसदी  और 18 फीसदी जीएसटी की स्टैंडर्ड दरें होंगी।

स्टैंडर्ड रेट का मतलब है कि अधिकतर वस्तुएं इसी दर के दायरे में आएंगी। एक स्लैब जीरो रेटेड है, जिसमें आवश्यक वस्तुएं शामिल होंगी। इसी श्रेणी में चावल, दाल समेत सभी खाद्यान्न आएंगे। जीएसटी लागू करने के बारे में उन्होंने बताया कि अभी तक जीएसटी के लिए सभी चीजें समय सीमा के अंदर चल रही हैं और इसे पूर्व निर्धारित समय से ही लागू किया जाएगा। हालांकि यूबीएस की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि जीएसटी प्रणाली यदि आगामी अप्रैल से लागू नहीं होगी तो यह अगले साल अप्रैल से जरूर लागू हो जाएगी।
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कई वस्तुएं होंगी सस्ती

जीएसटी
बृहस्पतिवार को केंद्र और राज्यों के बीच जो सहमति बनी है, उससे आम नागरिकों को कुल मिला कर राहत मिलेगी। जीएसटी प्रणाली के तहत पहले जिन कुछ दरों की बात की जा रही थी, उनसे कम दरें ही तय हुई हैं। पहले जिन आवश्यक वस्तुओं पर छह फीसदी की दर से जीएसटी लगने की बात थी, उन पर पांच फीसदी की दर से ही जीएसटी लगेगी।

इसके अलावा छोटी कार, टीवी, फ्रिज, टॉयलेटरिज, तेल, साबुन, सेविंग किट आदि भी सस्ते हो सकते हैं, क्योंकि इन सामानों पर जीएसटी की दर मौजूदा दरों से कम होगी। जेटली ने बताया कि छोटी कारें और कई तरह के इलेक्ट्रॉनिक सामान यानी व्हाइट गुड्स पर अभी केंद्र  सरकार 12.5 फीसदी की दर से केन्द्रीय उत्पाद शुल्क वसूलती है जबकि राज्य सरकारें 14.5 फीसदी की दर से वैट या बिक्री कर वसूलती है।

यही 27 फीसदी बैठता है। जब कैसकेडिंग इफेक्ट देखेंगे तो यह 30 से 31 फीसदी तक बैठता है। लेकिन जीएसटी की प्रस्तावित व्यवस्था में इस तरह के सामानों पर 28 फीसदी की दर से जीएसटी लगाने का प्रस्ताव है। मतलब ग्राहकों को दो-तीन फीसदी का फायदा।

सोना और लग्जरी सामान हो सकता है महंगा

डेमो पिक
जेटली ने बताया कि फिलहाल सोना पर जीएसटी की दर के बारे में फैसला नहीं हुआ है। लेकिन, उल्लेखनीय है कि केंद्र ने इस पर चार फीसदी के जीएसटी का प्रस्ताव दिया है। फिलहाल स्वर्णाभूषण पर केंद्र सरकार एक फीसदी का केंद्रीय उत्पाद शुल्क वसूलती है जबकि अधिकतर राज्य एक फीसदी का वैट या बिक्री कर वसूलते हैं।

यदि इस पर चार फीसदी का जीएसटी लगता है तो ग्राहकों को महंगा पड़ेगा। इसी तरह कार्बोनेटेड पेय (कोल्ड ड्रिंक), पान मसाला, लग्जरी कार और तंबाकू उत्पादों पर तो 28 फीसदी के जीएसटी स्लैब में रखा गया है, लेकिन इसके ऊपर सेस भी लगेगा। इन सामानों पर कुल टैक्स की मौजूदा दर और 28 फीसदी के बीच के बराबर सेस  लगेगा। उदाहरण के लिए अभी यदि ऐसे किसी सामान पर केंद्र और राज्य के टैक्स को  मिलाकर कुल 40 फीसदी की दर से टैक्स लगता है तो उस पर सेस की दर 12 फीसदी  होगी।

आवश्यक वस्तुओं पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा

जीएसटी बिल - फोटो : ANI
गेहूं, चावल, दाल, तिलहन आदि आवश्यक जिंसों पर अभी भी कोई टैक्स नहीं लगता है और जीएसटी प्रणाली में भी कोई फर्क नहीं पड़ेगा। जेटली ने बताया कि एक जीरो रेटेड स्लैब है, जिसमें महंगाई की दरों के खुदरा मूल्य सूचकांक -सीपीआई- में शामिल करीब 50 फीसदी वस्तुएं इसमें शामिल होंगी। खाद्यान्न भी इसी में शमिल होंगे। आम आदमी के इस्तेमाल में आने वाली वस्तुओं पर पांच फीसदी की जीएसटी देय होगी।

सचिवों की समिति तय करेगी
जेटली ने साफ किया है कि किस जीएसटी स्लैब में किस सामान को रखा जाएगा, इस पर अभी फैसला नहीं हुआ है। इस बारे में सचिवों की एक समिति विस्तृत सूची बनाएगी। यही समिति तय करेगी कि लग्जरी सामानों पर 28 फीसदी के अलावा लगने वाले सेस का रेट क्या हो। उन्होंने बताया कि इस समिति का काम तुरंत शुरू हो जाएगा।

सेस पांच साल के लिए
केंद्रीय वित्त मंत्री ने बताया कि लक्जरी सामानों पर जो सेस लगाया जाएगा, वह पांच साल के लिए है। इस सेस से हुई कमाई के जरिए राज्यों को मुआवजा दिया जाएगा। यही नहीं, जिन सामानों पर जीएसटी की दर महज पांच फीसदी वसूली जाएगी, उस मद में कर वसूली में हुए घाटे की भरपाई इसी सेस से की जाएगी। उसके बाद जीएसटी काउंसिल तय करेगी की आगे क्या व्यवस्था होगी।
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मुआवजे के लिए 50 हजार करोड़ की जरूरत

GST BILL
जेटली ने बताया कि जीएसटी लागू होने की सूरत में राज्यों को राजस्व में हुए घाटे की भरपाई केंद्र की तरफ से की जाएगी। इस मद में पहले साल ही केन्द्र सरकार को करीब 50 हजार करोड़ रुपये की जरूरत पड़ेगी। गौरतलब है कि जीएसटी लागू करने में राज्यों को सहमत करने के लिए केंद्र ने पांच वर्षों तक राजस्व वसूली में हुई क्षतिपूर्ति की भरपाई करने का वचन दिया है।

सस्ता होगा
रोजमर्रा इस्तेमाल के सामान,छोटी कारें, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और इलेक्ट्रॉनिक सामान,टॉयलेटरिज, तेल, साबुन, सेविंग किट 

महंगा होगा
सोना, ज्वैलरी लग्जरी आइटम,सिगरेट, पान मसाला,लग्जरी कार ,कोल्ड ड्रिंक, सॉफ्ट ड्रिंक ,ब्रांडेड टूथपेस्ट 

कुछ पेंच भी 
सर्विसेज के लिए कोई दर तय नहीं
जीएसटी के तहत वस्तुओं (गुड्स) के लिए अलग-अलग टैक्स दरें तय कर दी गई हैं। लेकिन सेवाओं (सर्विसेज) के लिए कोई दर निर्धारित नहीं है। उम्मीद है कि इसके लिए एक दर तय की जाएगी ।
एक राज्य, एक वोट पर सवाल राज्यों के बीच जीएसटी काउंसिल में एक राज्य, एक वोट पर भी सवाल उठेगा। देश के 6 राज्यों की इकोनॉमी 23 राज्यों के बराबर है। मसलन, तमिलनाडु की अर्थव्यवस्था हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था से दस गुनी बड़ी है। ऐसे में दोनों को समान वोट का अधिकार कैसे दिया जा सकता है।

तय करना होगा क्या है लग्जरी आइटम
जरूरी नहीं कि एक राज्य में लग्जरी माना जाने वाला आइटम दूसरे राज्य में लग्जरी आइटम हो। तमिलनाडु में 70 फीसदी लोग ब्रांडेड टूथपेस्ट का इस्तेमाल करते हैं लेकिन यूपी में ऐसा नहीं है। इसलिए यह राष्ट्रीय स्तर पर तय करना होगा कि लग्जरी आइटम क्या हैं। 
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