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मुलायम और मायावती बन सकते हैं जीएसटी बिल पर तारणहार

Tue, 17 May 2016 03:45 AM IST
राघवेंद्र नारायण मिश्र/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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राज्यसभा में भाजपा के स्थिति कमजोर है - फोटो : PTI
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राज्यसभा में संख्या बल के समीकरणों में उलटफेर के बाद सरकार को जीएसटी बिल पास होने की उम्मीद जगी है। रणनीति के तहत मुलायम सिंह यादव और मायावती के अलावा कुछ क्षेत्रीय दलों को भी जीएसटी पर तारणहार बनाने की तैयारी है। चूंकि जीएसटी बिल संविधान संशोधन से जुड़ा है इसलिए इसे पारित कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरुरत होगी।
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कांग्रेस की संख्या घटने के बाद भी जरूरी आंकड़े तक पहुंचने के लिए सरकार को पापड़ बेलने पड़ सकते हैं। फिलहाल सरकार आंकड़े साधने के लिए जुगत भिड़ा रही है। आबजपा को तमिलनाडु विधानसभा चुनाव प्रचार की कड़वाहट को मिटाकर जयललिता को पक्ष में कर लेने का विश्वास है। पांच राज्यों के चुनाव नतीजे भी इस सियासी खेल में अहम भूमिका अदा करने वाले हैं। 

बसपा प्रमुख मायावती ने जीएसटी बिल में सरकार को सहयोग का एलान कर दिया है और सरकार को उम्मीद है कि मुलायम भी देर-सबेर खुलकर इसके पक्ष में आ सकते हैं। हांलाकि मायावती को इस बार राज्यसभा चुनाव में नुकसान ही हो रहा है। बसपा के पांच सदस्य रिटायर हो रहे हैं जबकि वापसी सिर्फ दो सदस्यों की ही होगी। मुलायम की समाजवादी पार्टी के 11 सदस्य वापस आएंगे। इसलिए सपा की भूमिका अहम रहने वाली है। भाजपा को चार सीटों का मामूली फायदा और कांग्रेस को पांच सीटों का नुकसान लगभग तय है। 
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दिग्गजों की राज्यसभा में वापसी पर ग्रहण की आशंका

राम जेठमलानी की कट सकता है पत्ता - फोटो : Getty
उधर कई दिग्गजों का भविष्य पांच राज्यों के चुनाव नतीजों पर टिक गया है। पूर्व रक्षा मंत्री ए के एंटनी तभी वापस आ सकते हैं जब कांग्रेस केरल में अच्छी सीटें हासिल करने में सफल हो पाएगी। कांग्रेस के जयराम रमेश की वापसी तबतक संभव नहीं दिखती है जबतक उन्हें तेलंगाना समिति का समर्थन हासिल नहीं हो। भाजपा इस बार राम जेठमलानी को मौका देने के मूड में नहीं है। इस तरह कई दिग्गजों की राज्यसभा में वापसी पर ग्रहण लगने की आशंका है। 

भाजपा के रणनीतिकार मानते हैं कि 11 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव के बाद भी कांग्रेस ही ऊपरी सदन में सबसे बड़ी पार्टी रहेगी लेकिन एनडीए की स्थिति बेहतर जरूर हो जाएगी।  भाजपा और सहयोगी दल मिलाकर लगभग 110 सदस्य जीएसटी बिल के पक्ष में हैं। अन्य दलों के 44 सदस्यों का भी इस बिल को समर्थन हासिल है। यह आंकडा़ भी 154 तक ही पहुंचता है। अगर भाजपा 10 और सदस्यों का समर्थन जुटा पाती है तो दो तिहाई बहुमत के लिए 164 सदस्यों की जरुरत पूरी हो सकती है। वैसे कांग्रेस से भी सहयोग की फिर से अपील की जाएगी।

राज्यसभा में 53 सदस्यों की विदाई के वक्त प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जीएसटी बिल पास नहीं होने पर दुख जताया था लेकिन साथ ही यह भी कहा था कि नए आने वाले सदस्य इस बिल के पारित होने के साक्षी बन सकते हैं। कांग्रेस के आनन्द शर्मा ने भी तब आने वाले दिनों में सहमति से विवाद सुलझा लिए जाने के संकेत दिए थे। इस मेलमिलाप के सुरों से अलग भाजपा ने कांग्रेस के सहयोग नहीं मिलने की स्थिति में भी जीएसटी बिल पारित कराने की व्यूहरचना पर काम शुरू कर दिया है। पांच राज्यों के चुनावों के नतीजे आने के बाद यह कोशिश और तेज होगी ताकि मानसून सत्र में जीएसटी बिल को पारित कराया जा सके।
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