राज्यसभा में भाजपा के स्थिति कमजोर है
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राज्यसभा में संख्या बल के समीकरणों में उलटफेर के बाद सरकार को जीएसटी बिल पास होने की उम्मीद जगी है। रणनीति के तहत मुलायम सिंह यादव और मायावती के अलावा कुछ क्षेत्रीय दलों को भी जीएसटी पर तारणहार बनाने की तैयारी है। चूंकि जीएसटी बिल संविधान संशोधन से जुड़ा है इसलिए इसे पारित कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरुरत होगी।
कांग्रेस की संख्या घटने के बाद भी जरूरी आंकड़े तक पहुंचने के लिए सरकार को पापड़ बेलने पड़ सकते हैं। फिलहाल सरकार आंकड़े साधने के लिए जुगत भिड़ा रही है। आबजपा को तमिलनाडु विधानसभा चुनाव प्रचार की कड़वाहट को मिटाकर जयललिता को पक्ष में कर लेने का विश्वास है। पांच राज्यों के चुनाव नतीजे भी इस सियासी खेल में अहम भूमिका अदा करने वाले हैं।
बसपा प्रमुख मायावती ने जीएसटी बिल में सरकार को सहयोग का एलान कर दिया है और सरकार को उम्मीद है कि मुलायम भी देर-सबेर खुलकर इसके पक्ष में आ सकते हैं। हांलाकि मायावती को इस बार राज्यसभा चुनाव में नुकसान ही हो रहा है। बसपा के पांच सदस्य रिटायर हो रहे हैं जबकि वापसी सिर्फ दो सदस्यों की ही होगी। मुलायम की समाजवादी पार्टी के 11 सदस्य वापस आएंगे। इसलिए सपा की भूमिका अहम रहने वाली है। भाजपा को चार सीटों का मामूली फायदा और कांग्रेस को पांच सीटों का नुकसान लगभग तय है।