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12 साल पुराने मामले में आदित्यनाथ ने किया सरेंडर, मिली जमानत

Tue, 17 May 2016 03:38 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सिद्धार्थनगर
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- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, सिद्धार्थनगर
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इटवा थाना क्षेत्र के शाहपुर चौराहे पर धारा-144 के उल्लंघन के 12 वर्ष पुराने मामले में गोरक्षपीठ के महंत व भाजपा सांसद आदित्यनाथ ने सोमवार को एसीजेएम कोर्ट में सरेंडर कर दिया। चंद मिनटों बाद ही कोर्ट ने उन्हें 15 हजार के निजी मुचलके पर जमानत दे दी।
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कोर्ट ने एक जमानतदार से 15 हजार रुपये की जमानत राशि भी जमा कराई। इस मामले में नामजद कुल दस आरोपियों में से चार अन्य ने भी जमानत कराई। सांसद आदित्यनाथ सहित अन्य आरोपियों को कोर्ट ने गैर जमानती वारंट जारी किया था।

इस पर सरेंडर करने के लिए सांसद दोपहर ठीक साढ़े 12 बजे एसीजेएम चंद्रशेखर मिश्र की कोर्ट में पेश हुए। यहां अधिवक्ता रमेश कुमार पांडेय व विजय गुप्ता ने जमानत अर्जी दाखिल की। चंद मिनट की कागजी प्रक्रियाओं के बाद कोर्ट ने जमानत मंजूर कर ली।
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सेहरी एस्टेट के कुंवर अजय सिंह ने सांसद की जमानत ली। हियुवा के प्रदेश प्रभारी राघवेंद्र प्रताप सिंह की जमानत लवकुश ओझा ने ली। इनके अलावा भाजपा नेता राकेश सिंह पहलवान, गोरखपुर यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष विजय नारायण सिंह, हियुवा के जिला प्रभारी श्यामधनी राही ने भी जमानत ली।
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15 हजार के मुचलके पर महंत आदित्यनाथ को जमानत

मामले में कुल दस लोग नामजद किए गए थे। इसमें नौ के विरुद्ध चार्जशीट कोर्ट में दाखिल हुई थी। आरोपी विष्णुदत्त की मृत्यु हो चुकी है। कोर्ट में पेशी के दौरान सांसद जगदंबिका पाल, भाजपा जिलाध्यक्ष रामकुमार कुंवर, सिविर सिद्धार्थ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अखंड प्रताप सिंह सहित अन्य पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे। सुरक्षा के मद्देनजर एसपी अजय कुमार साहनी खुद कोर्ट परिसर में डटे रहे।

यह है मामला
धारा-144 के उल्लंघन का मामला तकरीबन 12 वर्ष पुराना है। डुमरियागंज में विकलांग बालिका की दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले में कई दिनों बाद भी मुकदमा दर्ज न किए जाने पर शाहपुर चौराहे पर हिंदू चेतना रैली आयोजित की गई थी।

रैली से कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका में जिला प्रशासन ने धारा-144 लागू किया था। सांसद को सभास्थल तक पहुंचने से रोकने के लिए पूरे जिले की फोर्स की घेरेबंदी लगा दी गई थी। बावजूद सारी घेरेबंदी को धता बताते हुए आदित्यनाथ ने कार्यक्रम स्थल पर पहुंचकर सभा की थी। इसके बाद सांसद समेत 10 नामजद व सैकड़ों अज्ञात लोगों के लिए खिलाफ आईपीसी की धारा-188 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।
 
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