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किसान आंदोलन को समर्थन देने के नाम पर चलाया जा रहा प्रोपेगेंडा, यहां पढ़ें ग्रेटा थनबर्ग का भारत विरोधी दस्तावेज

Thu, 04 Feb 2021 11:39 AM IST
दीप्ति मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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ग्रेटा थनबर्ग - फोटो : पीटीआई
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कृषि कानूनों के विरोध में देश की राजधानी दिल्ली में करीब ढाई माह से किसान आंदोलन जारी है। इस बीच, किसान आंदोलन को समर्थन देने के नाम पर भारतीय लोकतंत्र को बर्बाद करने की अंतरराष्ट्रीय साजिश का खुलासा हुआ है। भारत के खिलाफ साजिश को सफल बनाने में स्वीडन की पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग ने बेहद शातिर तरीके से योजना बनाई। इस योजना को गलती से उन्होंने ट्वीट कर दिया। हालांकि, जिसे बाद में उन्होंने डिलीट भी कर दिया। आइए हम आपको बताते हैं कि ग्रेटा थनबर्ग द्वारा ट्विटर पर शेयर किए गए भारत विरोधी दस्तावेज में क्या लिखा था...

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ग्रेटा थनबर्ग ने किसानों के समर्थन में किए गए अपने ट्वीट में भारत की सत्तारूढ़ पार्टी भारतीय जनता पार्टी को फासीवादी पार्टी करार दिया। ग्रेटा ने ट्वीट कर बताया कि भारत सरकार पर किस तरह दबाव बनाया जा सकता है, इसके लिए उन्होंने अपनी कार्य योजना से संबंधित एक दस्तावेज भी साझा की। दस्तावेज को पढ़ने के बाद स्पष्ट होता है कि ग्रेटा किसी बड़ी भारत विरोधी प्रोपेगेंडा मुहिम की हिस्सा हैं। ग्रेटा थनबर्ग के इस ट्वीट से खुलासा हुआ कि गणतंत्र दिवस पर हुई हिंसा से लेकर अब तक जो हुआ, वो सब एक साजिश के तहत हुआ है और इसमें वैश्विक शक्तियां भी जुड़ी हुई हैं।


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भारत विरोधी दस्तावेज में ग्रेटा थनबर्ग ये लिखा

  • ऑन ग्राउंड प्रोटेस्ट में हिस्सा ले :  दस्तावेज में लोगों से कहा गया कि ऑन ग्राउंड प्रोटेस्ट में हिस्सा लेने पहुंचें। किसान आंदोलन के साथ एकजुटता प्रदर्शन करने वाली तस्वीरें ई-मेल करें। ये तस्वीरें 25 जनवरी तक भेजें। (दिल्ली बॉर्डर पर डटे किसानों के साथ एकजुटता का प्रदर्शन)
  • डिजिटल स्ट्राइक करें : आंदोलन से जुड़े फोटो/वीडियो और मैसेज #AskIndiaWhy के साथ 26 जनवरी से पहले या 26 जनवरी तक ट्विटर पर पोस्ट किए जाएं। 
  • ट्विटर पर तूफान लाएं : 4-5 फरवरी को ट्विटर पर तूफान लाने की योजना बनाई गई, जिसमें किसान आंदोलन से जुड़ी चीजों, हैशटैग और तस्वीरों को ट्रेंड कराया जाएं। इसके लिए तस्वीरें, वीडियो मैसेज 5 फरवरी तक भेज दिए जाएं। आखिरी दिन 6 फरवरी का होगा।
  • भारत सरकार पर ऐसे बनाएं दबाव : किसान नेताओं और स्थानीय प्रतिनिधि से संपर्क स्थापित करें, इससे भारतीय सरकार पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनेगा।
  • भारतीय कारोबारियों को नुकसान पहुंचाएं : दो बड़े भारतीय व्यापारिक घरानों को हर हाल में कमजोर करना है, जो मोदी सरकार में गरीबों का उत्पीड़न कर रहे हैं। गरीबों की जमीन और मेहनत पर कब्जा कर रहे हैं, उनसे जमीन छीन रहे हैं।
  • दूतावास के बाहर करें प्रदर्शन: दस्तावेज में बताया गया है कि विदेशों में भारतीय दूतावासों के पास कब और कहां प्रदर्शन करना है। मीडिया हाउस, सरकारी इमारतों और अडानी-अंबानी के दफ्तर के बाहर प्रदर्शन करने की बात भी इसमें कही गई है।
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भारत के खिलाफ मुहिम कभी सफल नहीं होगी : जयशंकर

भारत के खिलाफ चलाए जा रहे अंंतरराष्ट्रीय प्रोपेगेंडा पर विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने ट्वीट कर कहा कि भारत को निशाना बनाकर चलाए जा रहे अभियान कभी सफल नहीं होंगे। हमें खुद पर विश्वास है, हम अपने दम पर खड़े रहेंगे। भारत इस साजिश को कामयाब नहीं होने देगा। 

 इससे पहले, विदेश मंत्रालय ने भी एक बयान जारी कर कहा था कि विदेशी हस्तियों को इस तरह के अभियानों का हिस्सा नहीं बनना चाहिए। ग्रेटा थनबर्ग के अलावा रिहाना और मिया खलीफा जैसे विदेशी सेलिब्रिटीज ने किसान आंदोलन पर ट्वीट किए थे।
बता दें कि ग्रेटा थनबर्ग दुनियाभर में जलवायु परिवर्तन को लेकर जागरुकता फैलाने के लिए जानी जाती हैं और इसके लिए उन्होंने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भी आलोचना की थी।
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