इस रिवाज के बारे में गांव के सरपंच श्रीनिवासुलु ने बीबीसी से कहा, "आध्यात्मिक गुरु नल्ला रेड्डी और उनके शिष्य माला दशारी चिंतला मुनिस्वामी ने गांव के विकास में अपनी पूरी शक्ति और धन लगा दिया था। उनकी किए कामों का आभार मानते हुए ग्रामीणों ने यहां उनके सम्मान में एक मंदिर स्थापित किया और उनकी पूजा करने लगे। ठीक उसी तरह अपने परिवार के बड़ों के सम्मान में ग्रामीण घर के बाहर उनकी कब्र बनाते हैं।"
यह रिवाज केवल भोग लगाने और पूजा करने तक ही सीमित नहीं है बल्कि जब वो नए गैजेट्स भी खरीदते हैं तो पहले उसे इन कब्रों के सामने रखते हैं, इसके बाद ही उसका इस्तेमाल शुरू करते हैं। श्रीनिवासुलु ने बीबीसी से कहा कि गांव वालों के बीच अंधविश्वास की गहरी जड़ों को हटा पाना बहुत मुश्किल है और अब उन्होंने गांव के बच्चों को शिक्षित करने का बीड़ा उठाया है क्योंकि वो ही भविष्य में बदलाव ला सकते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि बच्चों में कुपोषण गांव की एक और चिंता है और आंगनबाड़ी केंद्र के लिए और पहाड़ी ढलानों पर घर बनाने के लिए ग्रामीणों को जमीन आबंटन के लिए सरकार से अनुरोध किया गया है।
इस गांव में कुछ और भी प्रथाएं मौजूद हैं जैसे, यहां के लोग गांव के बाहर शादी नहीं करते और परंपरागत खाट पर भी नहीं सोते हैं। गांव वालों का मुख्य पेशा खेती है। यहां ये अनाज के अलावा प्याज, मूंगफली और मिर्च की भी खेती करते हैं। अय्या कोंडा को इस इलाके में खरगोशों की भारी आबादी के कारण पहले 'कुंडेलू पडा' (खरगोशों के लिए घर) के नाम से जाना जाता था। हालांकि बाद में इसका नाम अय्या कोंडा रखा गया।
गांव वालों को अपने राशन, पेंशन या रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पहाड़ी के नीचे गंजिहल्ली जाना पड़ता है। मंडल परिषद क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्र (एमपीटीसी) के सदस्य ख्वाजा नवाब कहते हैं कि कब्रिस्तान के निर्माण के लिए अगर सरकार जमीन आबंटित कर दे तो यह अंधविश्वास को दूर करने में समाधान के रूप में काम कर सकता है।
गांव के प्रमुख रंगास्वामी ने कहा, "पीढ़ियों से जिन रिवाजों का हम पालन करते आ रहे हैं उन्हें रोक देने से हमें नुकसान पहुंच सकता है। हम इस बात को लेकर भी चिंतित हैं कि भविष्य में कब्र बनाने के लिए हमारे पास जमीनें नहीं रह जाएंगी। हमारे गांव में नेता लोग चुनाव से पहले झांकने भी नहीं आते।" कुरनूल से सांसद बुट्टा रेणुका से जब बीबीसी ने पूछा तो उन्हें उनके क्षेत्र में पड़ने वाले इस गांव में ऐसी कोई प्रथा की जानकारी नहीं थी।
उन्होंने कहा कि वो पहली बार इस विषय में बीबीसी से ही सुन रही हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि ग्रामीणों को सहायता पहुंचाई जाएगी, साथ ही ये भी बताया कि उन्होंने जिला कलेक्टर से गांव की स्थिति पर एक रिपोर्ट तलब की है।