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सीतामढ़ी में बनेगा मां सीता का भव्य मंदिर: बिहार सरकार ने दी 12 एकड़ भूमि; तीर्थ स्थल का भी होगा विकास

Wed, 11 Jun 2025 01:40 AM IST
शुभम कुमार डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

नई दिल्ली स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में हुई प्रेस वार्ता में बताया गया कि सीतामढ़ी के श्रीरामजानकी स्थान पर मां सीता का भव्य मंदिर बनेगा। इसके लिए बिहार सरकार ने मंदिर निर्माण के लिए 12 एकड़ भूमि दी है। इसके साथ ही यहां 108 फीट ऊंची हनुमान प्रतिमा भी बनेगी।

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रामायण रिसर्च काउंसिल की प्रेस वार्ता - फोटो : रामायण रिसर्च काउंसिल
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विस्तार
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बिहार सरकार ने सीतामढ़ी में मां सीता के भव्य मंदिर-निर्माण के लिए 12 एकड़ भूमि आवंटित की है। इस स्थल पर मां सीता की भव्य मूर्ति बनाई जाएगी। मां सीता के प्राकट्य-स्थली से चार किलोमीटर दूर है। इसी स्थल पर भगवान हनुमान की 108 फीट ऊंची प्रतिमा का भी निर्माण किया जाएगा। मंदिर का निर्माण करने के साथ ही इसे जन-जन में ले जाने और देश की बेटियों में सीता का चरित्र लोकप्रिय बनाने के प्रयास भी किए जाएंगे।

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रामायण रिसर्च काउंसिल से जुड़े पदाधिकारियों ने मंगलवार को दिल्ली में एक प्रेस वार्ता कर बताया कि इस स्थल के विकास के साथ ही बिहार के पर्यटन को एक नई ऊंचाई मिलेगी। इससे देश की विकट परिस्थितियों के बीच देश के नागरिकों, बच्चों-बेटियों को देश की परंपराओं और संस्कृति से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। 
  
जूना अखाड़े के आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि जी महाराज ने कहा कि जिस तरह प्रभु श्री राम के जन्मस्थान पर दिव्य मंदिर बनने के साथ-साथ अयोध्या में अनेक अन्य मंदिरों-मठों का जीर्णोद्धार हुआ है, उसी तरह मां सीता के प्राकट्य क्षेत्र सीतामढ़ी में विकास होने से पूरे क्षेत्र के विकास को गति मिलेगी। निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी चित्प्रकाशानंद गिरि जी महाराज ने पूरे विश्व के सनातन परिवार से आह्वान किया कि वह रामायण रिसर्च काउंसिल के साथ जुड़ें और मां सीताजी के इस मंदिर निर्माण के लिए सहयोग दें।
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सीतामढ़ी के सांसद देवेश चंद्र ठाकुर ने कहा कि बिहार सरकार और केंद्र सरकार मां सीता के प्राकट्य-स्थल पर भव्य मंदिर-निर्माण के लिए प्रयत्न कर रही है और रामायण रिसर्च काउंसिल जैसी संस्था सीतामढ़ी को तीर्थ क्षेत्र बनाने के लिए प्रयत्न कर रही हैं। सीतामढ़ी के ही अति प्राचीन श्री राम जानकी स्थल पर भव्य मंदिर बनाने की दिशा में सभी संत मिलकर आगे बढ़ रहे हैं।

भूमि आरती का होगा आयोजन
काउंसिल के महासचिव कुमार सुशांत ने कहा कि मां सीता जी का संबंध भूमि से है। काउंसिल के अंतर्गत जल्द ही सीतामढ़ी में भूमि आरती की शुरुआत की जाएगी और यह शुरू होने के बाद इसे नियमित रूप से किया जाएगा। उन्होंने कहा कि काउंसिल का शुरू से संकल्प था कि 51 शक्तिपीठों से मिट्टी एवं ज्योति लाकर मां सीता को श्री भगवती के रूप में स्थापित करेंगे। 

कहां पर बनेगा मां सीता का भव्य मंदिर?
मंदिर के स्थान को लेकर स्वामी ज्ञानानंद ने कहा कि मां सीताजी का प्राकट्य स्थल और मंदिर बनने वाला स्थान अलग है। सीतामढ़ी में जो जगह है, वह मां सीताजी के प्राकट्य स्थल से लगभग 4 किलोमीटर दूर है। इस जगह का नाम श्रीरामजानकी स्थान है, जो बहुत पुराना और पवित्र मठ है। इसे ठीक करने और मंदिर बनाने के लिए काउंसिल लंबे समय से कोशिश कर रही थी।

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सीतामढ़ी को बनाया जाएगा तीर्थ स्थल
बता दें कि इस प्रेस वार्ता में कई संत और धर्मगुरु मौजूद थे। उन्होंने बताया कि सीतामढ़ी को तीर्थ स्थल बनाया जाएगा। यहां एक 108 फीट ऊंचा श्रीहनुमान जी की मूर्ति भी बनाई जाएगी। सभी संत मिलकर इस काम को आगे बढ़ाएंगे और लोगों को जोड़ेंगे।

राम मंदिर जैसा भव्य बनेगा मां सीता का मंदिर
वहीं मंदिर के निर्माण को लेकर जूना अखाड़े के स्वामी अवधेशानंद गिरि ने कहा कि जैसे अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर है, वैसे ही सीतामढ़ी में भी मां सीताजी के मंदिर को बढ़ावा दिया जाएगा। वहीं परमार्थ निकेतन के स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि मंदिर बनाने के साथ-साथ मां सीताजी के जीवन की सीख भी दुनिया तक पहुंचाई जाएगी।

इसके साथ ही सीतामढ़ी के सांसद देवेशचंद्र ठाकुर ने कहा कि यह उनके लिए गर्व की बात है कि बिहार सरकार और केंद्र सरकार मां सीताजी के मंदिर के लिए काम कर रही हैं। रामायण रिसर्च काउंसिल भी तीर्थ स्थल बनाने में मदद कर रही है।

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पीएम मोदी से हाथों होगी भूमि पूजा
काउंसिल के महासचिव कुमार सुशांत ने बताया कि जल्द ही मंदिर के लिए भूमि पूजा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों कराई जाएगी। काउंसिल 51 शक्तिपीठों से मिट्टी और ज्योत लाकर मां सीताजी को स्थापित करेगी। गौरतलब है कि इस कार्यक्रम में कई प्रमुख लोग और अधिकारी मौजूद थे। सभी ने मिलकर इस मंदिर निर्माण के लिए पूरी मदद करने का वादा किया है। इससे सीतामढ़ी धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से और भी खास बनेगा।

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