तलाशी छेत्र में रहने वाले सभी लोगो के लास्ट लोकेशन समेत मोबाइल फोन डेटा का इस्तेमाल उन स्थानों की पहचान करने के लिए किया गया था जहां बचाव अभियान चलाया जा सकता है। कलेक्टर ने कहा, हमने इन डेटा को असभी टीमों को दिया, जिससे की तलाशी अभियान तेजी से आगे बढ़े।
केरल के वायनाड में भूस्खलन के कारण मरने वालों की संख्या 300 के करीब पहुंच गई है। इस घटना के चौथे दिन भी मलबे में दबे शवों को बाहर निकालने के लिए तलाशी अभियान जारी है। केरल के एडीजीपी (कानून व्यवस्था) के अनुसार, 300 लोग अब भी लापता हैं।
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वायनाड जिला कलेक्टर ने शुक्रवार को बताया कि एरियल ड्रेन पिक्चर्स और सेल फोन के जीपीएस की का इस्तेमाल उन स्थानों की पहचान करने के लिए किया गया है जहां खोज और बचाव कार्य किया जा सकता है। वायनाड कलेक्टर मेघाश्री डीआर ने पत्रकारों से बात की। उन्होंने कहा कि सबसे प्रभावित क्षेत्रों में मुंडक्कई और चूरलमाला को उन छह क्षेत्रों में शामिल किया गया है, जहां लोगों को निकालने के लिए बचाव के लिए बचावकर्मियों की 40 टीमों को तैनात किया गया है। उन्होंने आगे बताया की ड्रोन से एरियल फोटोग्राफ्स लिया गया और कुछ इलाकों की तलाश के लिए जीपीएस का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
तलाशी छेत्र में रहने वाले सभी लोगो के लास्ट लोकेशन समेत मोबाइल फोन डेटा का इस्तेमाल उन स्थानों की पहचान करने के लिए किया गया था जहां बचाव अभियान चलाया जा सकता है। कलेक्टर ने कहा, हमने इन डेटा को असभी टीमों को दिया, जिससे की तलाशी अभियान तेजी से आगे बढ़े।
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बचाव कर्मियों की 40 टीमें भूस्खलन से प्रभावित छह क्षेत्रों अट्टामाला और अरनमाला, मुंडक्कई, पुंचिरीमट्टम, वेल्लारीमाला गांव, जीवीएचएसएस वेल्लारीमाला और नदी तट पर तलाशी अभियान चलाएंगी।