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मिथाइल अल्कोहल के टैंकरों पर होगा जीपीएस और ‘मौत का निशान’

Mon, 18 Jul 2016 04:15 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला मथुरा
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- फोटो : getty
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प्रदेश में जहरीली शराब से होने वाली मौतों ने हुकूमत को हिला दिया है। अब तक की घटनाओं की जो सैंपल रिपोर्ट शासन तक पहुंची हैं उसमें पता चला कि मिथाइल अल्कोहल से तैयार शराब पीने से मौत हो रही है। लिहाजा मिथाइल लेकर आने वाले टैंकरों की निगहबानी बढ़ाई जा रही है और टैंकरों पर जगह-जगह मौत का निशान बनाया जाएगा।
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मिथाइल अल्कोहल से तैयार की जाने वाली शराब से प्रदेश में तमाम लोगों की मौत हो चुकी है। क्योंकि मिथाइल और इथाइल अल्कोहल एक जैसा होता है लिहाजा कोई फर्क कर नहीं पाता और टैंकरों से निकाल लेते हैं। हालांकि नियम है कि मिथाइल अल्कोहल ढोने वाले टैंकरों पर मोटे-मोटे अक्षरों में लिखा होना चाहिए कि यह तेज जहर है और इसके सेवन से मौत हो जाती है। इस नियम की अनदेखी की जा रही है।

चेतावनी लिख दी जाएगी तो लोग जागरूक होंगे

- फोटो : getty
अफसरों का मानना है कि चेतावनी लिख दी जाएगी तो लोग जागरूक होंगे। अब फैसला किया गया है कि टैंकर पर ‘मौत का निशान’ बनाया जाएगा। निशान भी ऐसा होगा कि दूर से ही नजर आए। टैंकर पर कई जगह जहर शब्द भी मोटे-मोटे अक्षरों में लिखवाया जाएगा।

आबकारी विभाग के प्रमुख सचिव किशन सिंह अटोरिया का कहना है कि मिथाइल अल्कोहल प्रदेश में कहीं नहीं बनता है। लिहाजा शासन के माध्यम से मिथाइल बनाने वाली कंपनियों को पत्र जाएगा कि इन टैंकरों पर चेतावनी लिखवाएं। जीपीएस लगवाने की भी बात की जा रही है। क्योंकि मिथाइल वाले टैंकर गुजरात से आते हैं लिहाजा इन टैंकरों पर भी जीपीएस लगवाने को लिखा जा रहा है। 
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कलर बदलवाने को भेजा जाएगा प्रस्ताव, ढाबों पर नहीं रुकने चाहिए टैंकर

- फोटो : getty
मिथाइल और इथाइल अल्कोहल का कलर एक समान होता है। मिथाइल अल्कोहल का प्रयोग केमिकल इंडस्ट्री करती हैं। पेंट, थिनर आदि बनाने में इसका इस्तेमाल होता है। जबकि इथाइल अल्कोहल से शराब बनती है। अब आबकारी विभाग यह प्रस्ताव भेज रहा है कि मिथाइल का कलर बदल दिया जाए। इससे दोनों में अंतर आ जाएगा।

इसका कलर पिंक करने को कहा गया है। हालांकि एक बार पहले भी आबकारी विभाग ने यह प्रस्ताव भेजा था। शासन ने भी आदेश जारी कर दिया था, लेकिन यह योजना कानूनी अड़चनों में फंस गई थी।आबकारी विभाग के प्रमुख सचिव किशन सिंह अटोरिया ने सभी आबकारी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अपने-अपने क्षेत्र में ऐसे ढाबों का चिन्हीकरण करें जो टैंकर रुकते हैं। इन ढाबों की नियमित चेकिंग की भी व्यवस्था की जाए। पुलिस और आबकारी विभाग संयुक्त रूप से चेकिंग करे।
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