सरकार की ओर से मिलने वाली सभी तरह की सहायता और योजनाओं का लाभ निकट भविष्य में सिर्फ प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण (डीबीटी) योजना के तहत ही उठाया जा सकेगा। अपनी कई योजनाओं, सब्सिडी प्रणाली को पहले ही डीबीटी के हवाले कर चुकी मोदी सरकार ने इसका प्रारूप तैयार कर लिया है।
इस कड़ी में शनिवार को होने वाली अंतर्राज्य परिषद सचिवालय की 11वीं बैठक में खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्यों को भी अपनी योजनाओं और सहायता को सीधे डीबीटी से जोड़ने के लिए राजी करेंगे। डीबीटी योजना के कारण भ्रष्टाचार पर लगी नकेल के संदर्भ में पीएम मोदी हरियाणा, पंजाब और दिल्ली जैसे आधा दर्जन राज्यों का उदाहरण देकर अन्य राज्यों को साधने की कोशिश करेंगे।
खास बात यह है कि इस बैठक के एजेंडे में जिन दो मुद्दों को राज्यों से विमर्श के लिए चुना गया है उसमें सभी तरह की सरकारी सहायता को डीबीटी योजना से जोड़ने और इसके लिए आधार को पहचान का मुख्य स्रोत के रूप में स्वीकार करने का मुद्दा सबसे अहम है।
प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक के एजेंडे में सरकार ने कहा है कि देश के 96 फीसदी वयस्कों के पास आधार कार्ड है। इतने ही वयस्क केवाईसी और खातों के जरिए सीधे बैंक से जुड़ चुके हैं। इसके अलावा सौ करोड़ लोगों के पास मोबाइल नंबर हैं। ऐसे में जाम (जनधन बैंक खाता, आधार और मोबाइल) के जरिए डीबीटी योजना को सुगमता से पूरे देश में लागू किया जा सकता है।
डीबीटी के कारण भ्रष्टाचार पर लगे नकेल के लिए भी एजेंडे में हरियाणा, पंजाब और दिल्ली जैसे राज्यों को मिली सहायता का जिक्र किया गया है। खासतौर से हरियाणा को मिली सफलता का जिक्र करते हुए बताया गया है कि इस राज्य ने डीबीटी लागू कर केरोसीन हासिल करने वाले 6 लाख नकली परिवारों, 40 फीसदी फर्जी छात्रवृत्ति और डेढ़ लाख फर्जी पेंशन से निजात पाई।