पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बुधवार को कहा कि प्रदूषण की समस्या को पुख्ता तरीके से पहचानने और उसके समाधान के लिए जल्द ही देश में एक नया प्रदूषण शोध संस्थान स्थापित किया जा सकता है। संस्थान के खाके को लेकर अभी विचार-विमर्श चल रहा है। इस नए प्रदूषण शोध संस्थान का काम प्रदूषण के हर पहलू पर बारीकी से विचार करना और उसका हल निकालना होगा।
जावडे़कर ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की ओर से आयोजित एक कार्यशाला में कहा कि हर छह महीने पर राज्यों के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड केंद्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर इस कार्यशाला का आयोजन करें। इस कार्यशाला में देश के सभी राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व कमेटी के चेयरमैन व सदस्य सचिवों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला का मकसद देश में प्रदूषण नियंत्रण कार्यक्रम को तेजी देने के लिए एजेंडा तैयार करना था। जावडे़कर ने कहा कि सुशासन में सभी को आदेशों का पालन करना ही होगा। प्रदूषण मानकों को तोड़ने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
सरकार लोगों को इज ऑफ डूइंग रिस्पांसेबल बिजनेस उपलब्ध कराना चाहती है। लेकिन प्रदूषण संबंधी चुनौतियों पर भी बातचीत जरूर होगी। हमारा उद्देश्य है कि विकास बिन नुकसान के होना चाहिए। इसलिए सरकार टिकाऊ विकास पर जोर दे रही है। वायु प्रदूषण, औद्योगिक प्रदूषण, बालू का खनन, नदियों का प्रदूषण, कचरा प्रबंधन जैसे मुद्दों पर बातचीत का होना एक अच्छे विकास का संकेत है।