केंद्र सरकार 20 अप्रैल से कुछ ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनियों को काम करने की इजाजत दे सकती है। इसके लिए ऐसी गाइडलाइन बनाने की कोशिश हो रही है जिससे फूड डिलीवरी के दौरान कोरोना संक्रमण का खतरा न हो।
देश में भारी संख्या में स्ट्रीट फूड वेंडर्स हैं। इनसे संक्रमणमुक्त सुरक्षित भोजन बनाना और उसकी सुरक्षित सप्लाई करना बड़ी चुनौती होगी। सामान्य तौर पर आम लोगों की निगाह में स्ट्रीट फूड को स्वास्थ्य के लिहाज से बहुत अच्छा नहीं माना जाता है।
नासवी के अध्यक्ष अरबिंद सिंह ने अमर उजाला को बताया कि कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए वे अपने से संबद्ध सभी वेंडरों को स्वास्थ्यप्रद खाना बनाने और संक्रमण से बचने की तकनीकी की जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं।
लोगों को खाद्य सामग्री देने के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग, सैनिटाइजर और मास्क का इस्तेमाल सिखाया जा रहा है। सरकार इसमें आवश्यक प्रावधान जोड़ सकती है और स्थानीय प्रशासन की मदद से अन्य कंपनियों की तरह उनके साथ भी नियमों का पालन अनिवार्य बना सकती है।
फूड प्रोग्राम हेड संगीता सिंह के मुताबिक शनिवार को उन्होंने वेंडर्स के साथ जूम एप पर ऑनलाइन बैठक कर इससे संबंधित तरीकों का विश्लेषण किया। केंद्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी से इस पर विचार करने के लिए कहा गया है। केंद्र से अनुमति मिलने के बाद इस पर काम पूरा कर लिया जाएगा।
बड़ी ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनियों से सुरक्षित भोजन सप्लाई किए जाने की योजना पर काम हो रहा है। दक्षिणी जिले के जिलाधिकारी बीएम मिश्रा ने कहा कि जहां तक ऑनलाइन फूड डिलीवरी करने वाली कंपनियों की बात है, सभी कंपनियों को प्रत्येक दिन अपने कर्मचारियों की स्क्रीनिंग करनी होगी।
उनका बुखार, कफ या श्वास लेने की परेशानी को रोजाना कंपनी के स्तर पर ही चेक किया जाएगा जिससे कोरोना संक्रमण फैलने की कोई गुंजाइश न रहे।
अनुमान के मुताबिक देश में 2.5 करोड़ वेंडर हैं। इनमें लगभग एक तिहाई स्ट्रीट फूड से जुड़े हुए हैं। इनके माध्यम से लगभग दो करोड़ लोगों को रोजगार प्रत्यक्ष तौर पर जुड़ा हुआ है। कोरोना संक्रमण को ध्यान में रखते हुए अगर इनको अनुमति मिलती है, तो इससे इनके रोजगार की समस्या का भी समाधान होगा।