कुल सरकारी स्वास्थ्य व्यय में केंद्र की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2018-19 में घटकर 34.3 प्रतिशत हो गई। 2017-18 में यह 40.8 प्रतिशत थी। इसी अवधि के दौरान राज्यों की हिस्सेदारी 59.2 प्रतिशत से बढ़कर 65.7 प्रतिशत हो गई।
सरकार की ओर से सोमवार को जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में स्वास्थ्य क्षेत्र पर व्यय 2018-2019 में घटकर 1.28 प्रतिशत रह गया। जबकि वित्त वर्ष 2017-2018 में यह व्यय 1.35 प्रतिशत था।
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वहीं कुल सरकारी स्वास्थ्य व्यय में केंद्र की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2018-19 में घटकर 34.3 प्रतिशत हो गई। 2017-18 में यह 40.8 प्रतिशत थी। ताजा राष्ट्रीय स्वाथ्य अनुमान बताते हैं कि इसी अवधि के दौरान राज्यों की हिस्सेदारी 59.2 प्रतिशत से बढ़कर 65.7 प्रतिशत हो गई।
इसी अवधि में कुल स्वास्थ्य व्यय के रूप में अपनी जेब से किए गया व्यय भी 48.8 प्रतिशत से गिरकर 48.2 प्रतिशत हो गया। 2013-14 में यह व्यय 64.2 प्रतिशत था। यानि 16 प्रतिशत कम हो गया। यह व्यय स्वास्थ्य देखभाल के लिए भुगतात करने में परिवारों के लिए उपलब्ध वित्तीय सुरक्षा की सीमा को दर्शाता है।
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उपलब्ध आकड़ों के मुताबिक, सकल घरेलू उत्पाद में जब कुल स्वास्थ्य व्यय की बात आती है तो यह 2018-19 में घटकर 3.2 प्रतिशत रह गया, जबकि इससे पहले वित्त वर्ष में यह 3.3 प्रतिशत था। वित्त वर्ष 2013-2014 में 4 प्रतिशत था।
हालांकि प्रति व्यक्ति कुल स्वास्थ्य व्यय वित्त वर्ष 2018-2019 में बढ़कर 4,470 रुपये हो गया, 2017-2018 में यह 4,297 रुपये था। 2013-2014 में यह 3,638 रुपये था। स्वास्थ्य देखभाल के लिए सामाजिक सुरक्षा नेटवर्क व्यय 2013-14 में 6 प्रतिशत था। 2018-19 में बढ़कर यह 9.6 प्रतिशत हो गया।