केंद्र सरकार ने इंदिरा आवास योजना का नाम और ‘दाम’ बदल दिया है। अब इसे प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के नाम से जाना जाएगा। घर बनवाने के लिए दी जाने वाली 70 हजार रुपये की रकम बढ़ाकर अब 1.20 लाख रुपये कर दी गई है। इसके अतिरिक्त जरूरत पर लाभार्थियों को 70 हजार रुपये कर्ज भी दिया जा सकेगा, जबकि 12 हजार रुपये शौचालय के निर्माण के लिए दिए जाएंगे।
केंद्र सरकार ने गरीबों को घर देने के लिए करीब 30 साल पहले इंदिरा आवास योजना की शुरुआत की थी, मगर एक अप्रैल से इसका नाम बदल दिया गया है। प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के नए नामकरण के साथ इसके लाभार्थियों को दी जाने वाली रकम का आंकड़ा भी बदला है। लाभार्थी चयन के मानकों में 2011 की सामाजिक आर्थिक, जातिगत जनगणना को आधार बनाया है। इसमें जिन लोगों को सबसे कम अंक मिले हैं और जिनके पास आवास नहीं हैं तो उन्हें प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत लाभ मिलेगा।
सबसे पहले ऐसे लोगों को आवास मिलेगा जिनके पास झोपड़ी और कच्चा मकान होगा। उसके बाद उन्हें, जिनके घर की दीवार पक्की है पर छत नहीं है। इसकी शुरुआत सर्वे में सबसे कम अंक पाने वालों से ही होगी। पहले इस योजना का लाभ सिर्फ उन्हें मिलता था जिनका नाम बीपीएल सूची में होता था पर अब यह बाध्यता समाप्त कर दी गई है। अब उस हर व्यक्ति को आवास मिलेगा जो गरीब है। बस वह सामाजिक -आर्थिक जनगणना के मानकों को पूरा करता हो।