दक्षिण भारत के कुछ राज्यों की राजनीति में बीते काफी समय से सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। जहां, भाजपा शासित राज्य कर्नाटक में विपक्षी दल सरकार के ऊपर एक के बाद एक आरोप लगा रहे हैं। वहीं, गैर भाजपा शासित तीन राज्यों में सरकार और राज्यपाल के बीच खींचतान जारी है। केरल और तेलंगाना के बाद अब तमिलनाडु में भी सरकार और राज्यपाल के बीच जोर की ठन गई है। दरअसल, बुधवार को तमिलनाडु सरकार ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से राज्यपाल रविन्द्र नारायण रवि को उनके पद से वापस बुलाने की मांग की है।
तमिलनाडु सरकार और राज्यपाल के बीच कलह हुई तेज
तमिलनाडु सरकार और वर्तमान राज्यपाल रविन्द्र नारायण रवि के बीच जारी कलह बुधवार को और बढ़ गई है। मिली जानकारी के मुताबिक, बुधवार को राज्य में सत्तारूढ़ डीएमके ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक ज्ञापन सौंपा है। इसमें डीएमके ने मांग की है कि राज्य के राज्यपाल रविन्द्र नारायण रवि को उनके पद से वापस बुलाया जाए। इस संबंध में डीएमके द्वारा जारी एक बयान के मुताबिक, इस ज्ञापन पर पार्टी के लोकसभा और राज्यसभा सदस्यों के साथ-साथ धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन में उसके गठबंधन सहयोगियों ने भी हस्ताक्षर करके अपना समर्थन दिया है।
राज्यपाल के खिलाफ राष्ट्रपति को सौंपा ज्ञापन
राज्यपाल आरएन रवि के खिलाफ राष्ट्रपति मुर्मू को सौंपे गए इस ज्ञापन में स्टालिन सरकार ने आरोप लगाया है कि राज्यपाल आर एन रवि ने राज्य में सांप्रदायिक घृणा को भड़काया है। इसमें सरकार ने राजभवन के पास लंबित विधेयकों को भी सूचीबद्ध किया गया है। इन विधेयकों में राज्य को NEET मेडिकल परीक्षा के दायरे से छूट देने की मांग भी शामिल है। सरकार ने इन विधेयकों की स्वीकृति पर देरी को लेकर सवाल भी किया है।
कई मुद्दों पर आमने-सामने स्टालिन सरकार और राज्यपाल
गौरतलब है कि राज्यपाल आर एन रवि और एम के स्टालिन के नेतृत्व वाली सरकार एनईईटी सहित कई मुद्दों पर आमने-सामने हैं। वहीं, 23 अक्टूबर को कोयंबटूर कार विस्फोट की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंपने में सरकार द्वारा देरी को लेकर राज्यपाल की टिप्पणी के बाद दोनों के बीच तनातनी और बढ़ गई है।
तेलंगाना में राज्यपाल ने लगाए सरकार पर आरोप
तेलंगाना में भाजपा और सत्तारुढ़ टीआरएस के बीच सियासी घमासान तेज होता जा रहा है। इस सियासत में राज्यपाल भी निशाने पर आ गई हैं। उन्होंने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने अपना फोन टैप होने की आशंका जताई है। तेलंगाना की राज्यपाल तमिलिसाई सुंदरराजन ने कहा कि टेप के मुद्दे पर वे (राज्य सरकार) राजभवन को घसीटना चाहते थे और तुषार का जिक्र किया। तुषार मेरे एडीसी थे। मुझे संदेह है कि मेरा फोन टैप किया जा रहा है। तुषार मुझे दो दिन दीपावली की शुभकामनाएं देने के लिए पहले फोन कर रहे थे। उसके बाद ही उन्होंने तुषार का जिक्र किया।
राज्यपाल के विरोध में केरल सरकार अध्यादेश लाने की तैयारी में केरल सरकार
केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान और पिनराई विजयन सरकार के बीच चल रही जंग और भी तीखी होती जा रही है। अब राज्यपाल को विश्वविद्यालयों के चांसलर पद से हटाने के लिए केरल सरकार अध्यादेश लाने की तैयारी में है। हालांकि, इस अध्यादेश से पहले राज्य सरकार विशेषज्ञों से सलाह लेगी। जानकारी के मुताबिक, राज्य कैबिनेट विश्ववद्यालयों के चांसलर पद से राज्यपाल को हटाने के बाद उनकी जगह किसी विशेषज्ञ को नियुक्त करने पर विचार कर रही है। बता दें, इससे पहले ऐसा ही मामला पश्चिम बंगाल में सामने आया था, जब तत्कालीन राज्यपाल जगदीप धनखड़ के खिलाफ ममता सरकार ऐसा ही अध्यादेश लाने वाली थी।
राज्यपाल ने किया पलटवार
केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने भी मामले में बयान दिया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में कुलपति योग्यता के आधार पर नहीं, बल्कि पार्टी (CPIM) की सिफारिश पर नियुक्त होते हैं, इसलिए LDF उन्हें नियंत्रित करती है। वे हर समय विश्वविद्यालयों के मामले में दखल दे रहे थे, जिससे मैं नाराज था। हस्तक्षेप विश्वविद्यालयों के विकास से संबंधित नहीं था। यह ज्यादातर विभिन्न पदों पर बैठे माकपा नेताओं के रिश्तेदारों के बारे में था। उनकी सारी दिलचस्पी नियुक्तियों में थी।