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West Bengal: राज्यपाल बोस पहुंचे दक्षिणेश्वर मंदिर और मदर हाउस, कहा- पश्चिम बंगाल मेरा दूसरा घर

Sun, 29 Jan 2023 08:21 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता

सार

दक्षिणेश्वर मंदिर में पूजा अर्चना के बाद राज्यपाल सी वी आनंद बोस ने कहा कि पश्चिम बंगाल मेरा दूसरा घर है। मैं इस राज्य की समृद्ध संस्कृति और भाषा को सीखना और आत्मसात करना चाहता हूं। उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल कई महान लोगों की धरती रही है।
 
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पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी वी आनंद बोस ने राज्य को अपना दूसरा घर बताया है। वे रविवार को कोलकाता के दक्षिणेश्वर मंदिर और मिशनरीज ऑफ चैरिटीज के मदर हाउस पहुंचे थे। दक्षिणेश्वर मंदिर में पूजा अर्चना के बाद उनकी यह प्रतिक्रिया सामने आई। इससे पहले गुरुवार को उन्होंने सरस्वती पूजा के मौके पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अन्य गणमान्य लोगों की मौजूदगी में एक बच्चे को बंगाली वर्णमाला सिखाने की रस्म 'हेत खादी' निभाई थी। उस दौरान उन्होंने बांग्ला भाषा सीखने में रुचि जताई थी।

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राज्य और यहां के लोगों के प्रति अपने प्रेम के लिए जाने जाने वाले बोस ने हाल ही में इस गुरुवार को सरस्वती पूजा के अवसर पर 'हेट खड़ी' (बंगाली वर्णमाला सीखने की एक रस्म) भी की थी।

पश्चिम बंगाल मेरा दूसरा घर- राज्यपाल बोस
रविवार को दक्षिणेश्वर मंदिर में पूजा अर्चना के बाद राज्यपाल सी वी आनंद बोस ने पत्रकारों से वार्ता की। इस दौरान उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल मेरा दूसरा घर है। मैं इस राज्य की समृद्ध संस्कृति और भाषा को सीखना और आत्मसात करना चाहता हूं। उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल कई महान लोगों की धरती रही है।
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मदर टेरेसा की समाधि स्थल पर पहुंचे
दक्षिणेश्वर मंदिर में पूजा अर्चना के बाद राज्यपाल मदर हाउस के परिसर में स्थित मदर टेरेसा की समाधि पर भी पहुंचे। यहां उन्होंने मदर टेरेसा की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित की। साथ ही उन्होंने दोपहर की प्रार्थना में भी हिस्सा लिया और वहां मौजूद नन से बातचीत की। इस दौरान राज्यपाल बोस ने कहा कि मदर टेरेसा ने खुद को गरीबों के लिए समर्पित कर दिया था। उन्होंने अपने मिशन में जीवन की सभी सुख-सुविधाओं को त्यागते हुए मानवमात्र के लिए काम किया था।

किताब लिखने के लिए जताई थी बांग्ला भाषा सीखने में रुचि
पिछले साल नवंबर में कार्यभार संभालने के तुरंत बाद बोस ने एक किताब लिखने के लिए बांग्ला सीखने में अपनी रुचि व्यक्त की थी। 1977 बैच के केरल कैडर के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी के खाते में कई किताबें हैं। बोस ने उस दौरान कहा था कि अमी बांग्ला सिखबो, बांग्ला खूब सुंदोर भाषा, अमी बांग्ला के भालोबाशी। बांग्ला मानुष के अमी भालोबशी। जय बांग्ला। मैं बंगाली सीखूंगा। यह एक अच्छी भाषा है, मुझे बंगाल और इसके लोगों से प्यार है।

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