पंजीकरण तक नहीं करवा पाए मजदूरों का
याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इन अधिनियम को लागू करने के लिए उसने समय पर निर्देश दिए हैं। जिनमें मजदूरों के पंजीकरण, इसके लिए विशेषज्ञ समिति बनाने, नियमावली तैयार करने के लिए कहा गया था। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार द्वारा बताया गया कि देश में 4.5 करोड़ मजदूरों का पंजीकरण हो चुका है, लेकिन
सुप्रीम कोर्ट ने इस आंकड़े को विश्वसनीय नहीं मानते हुए केवल ‘गेस्टीमेट’ करार दिया।
पैसा मजदूरों के लिए खर्च करना था, कल्याण बोर्ड के लिए नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अधिनियमों के तहत कल्याण बोर्ड बनाकर यह पैसा मजदूरों के कल्याण में खर्च होना था। बोर्ड को वित्त वर्ष में संग्रह की गई कुल राशि का अधिकतम 5 प्रतिशत बोर्ड पर खर्च करने की छूट थी, बाकी 95 प्रतिशत मजदूरों के कल्याण पर खर्च होना चाहिए। लेकिन सामने यह आया है कि अधिकतर पैसा बोर्ड के कल्याण पर खर्च हुआ। ‘यह त्रासदी नहीं न्याय का उपहास है।’
वॉशिंग मशीन, लैपटॉप खरीद डाले बोर्ड ने
विभिन्न राज्यों द्वारा वसूले गए सेस को लेकर कैग की रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने कहा कि अधिकतर राज्यों ने पूरा पैसा बोर्ड को ट्रांसफर नहीं किया। कई जगह मजदूरों के लिए वॉशिंग मशीन और लैपटॉप खरीदे गए। यह हतप्रभ करने वाली बात है कि गरीब और अशिक्षित मजदूर इन वॉशिंग मशीन और लैपटॉप का क्या करेंगे? अगर इस तरह के खर्च को मिला दें, तब भी संग्रह हुई राशि का बमुश्किल 10 प्रतिशत पैसा मजदूरों के लिए खर्च हुआ।