इस बार बड़ा सवाल यही है कि क्या यह रिवाज बदल जाएगा या फिर यूं ही आगे भी चलता रहेगा? आइए जानते हैं उन राज्यों के बारे में जहां हर पांच साल में सरकारें बदल जाती हैं। उन राज्यों के बारे में भी जहां, पिछले आठ साल के अंदर ये रिवाज बदल गया।
हिमाचल प्रदेश की सभी 68 सीटों पर मतदान की प्रक्रिया समाप्त हो चुकी है। कुल 412 प्रत्याशियों के किस्मत का फैसला मतदाताओं ने ईवीएम में कैद कर दिया है। अब आठ दिसंबर को इसके नतीजे आएंगे। तभी ये भी साफ हो जाएगा कि करीब चार दशक से भी लंबे समय से हिमाचल प्रदेश में चला आ रहा रिवाज कायम रहेगा या फिर इस बार सारे समीकरण बदल जाएंगे? इसके साथ ये भी पता चल जाएगा कि भाजपा दोबारा सत्ता में वापसी करेगी या कांग्रेस का राज फिर होगा कायम?
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दरअसल हिमाचल प्रदेश, उन राज्यों में शुमार है जहां लंबे समय से हर पांच साल पर सरकारें बदल जाती हैं। हिमाचल प्रदेश में ये सिलसिला 1985 से चल रहा है। यहां की जनता पांच साल कांग्रेस तो पांच साल भाजपा को मौका देती है। मसलन 2012 में चुनाव जीतकर कांग्रेस ने सरकार बनाई थी, जबकि 2017 में भाजपा को पूर्ण बहुमत मिला।
ऐसे में इस बार बड़ा सवाल यही है कि क्या यह रिवाज बदल जाएगा या फिर यूं ही आगे भी चलता रहेगा? आइए जानते हैं उन राज्यों के बारे में जहां हर पांच साल में सरकारें बदल जाती हैं। उन राज्यों के बारे में भी जहां, पिछले आठ साल के अंदर ये रिवाज बदल गया।
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इन राज्यों में भी हर पांच साल में बदल जाती है सरकार
हिमाचल प्रदेश: हिमाचल में 1985 से हर साल सरकार बदल रही है। 1985 में राज्य में कांग्रेस की सरकार बनी थी। 1990 में चुनाव हुए तो भाजपा राज्य की सत्ता में आई। 1992 में केंद्र सरकार ने कई अन्य राज्यों की तरह हिमाचल की सरकार भी बर्खास्त कर दी। 1993 में नए सिरे से चुनाव हुए और राज्य में कांग्रेस की सत्ता आई।
1998 में एक बार फिर भाजपा सत्ता में लौटी तो 2003 में कांग्रेस को सत्ता मिली। 2007 में भाजपा के प्रेम कुमार धूमल राज्य के मुख्यमंत्री बने तो 2012 में कांग्रेस के वीरभद्र सिंह के हाथ में राज्य की कमान आई। 2017 के चुनाव में भी सत्ता बदलने का चलन कायम रहा और भाजपा सत्ता में लौटी।
कब-कब चुनाव हुए और किस पार्टी ने कितनी सीटें जीतीं?
चुनाव
कांग्रेस
भाजपा
1952
24
—
1967
34
भारतीय जनसंघ (07)
1972
53
भारतीय जनसंघ (05)
1977
09
जनता पार्टी (53)
1982
31
29 (भाजपा ने पहली बार चुनाव लड़ा)
1985
58
07
1990
09
46
1993
52
08
1998
31
31
2003
43
16
2007
23
41
2012
36
26
2017
21
44
राजस्थान: यहां 1993 के बाद से हर पांच साल में सत्ता परिवर्तन हो जाता है। 1990 में यहां भाजपा की सरकार बनी थी। भैरव सिंह शेखावत मुख्यमंत्री बने थे। इसके दो साल बाद यानी 1992 में यहां राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था। हालांकि, 1993 में भैरव सिंह शेखावत लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बने। 1998 में हुए चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा को पटखनी देकर सत्ता हासिल की। अशोक गहलोत सीएम बने। 2003 में हुए चुनाव में भाजपा ने वापस सत्ता हासिल कर ली। वसुंधरा राजे सिंधिया सीएम बनाईं गईं। इसके बाद 2008 में कांग्रेस, 2013 में भाजपा, 2018 में फिर से कांग्रेस की सरकार बनी। राज्य में ये चलन अब तक कायम है।
इन राज्यों में टूट चुका है ट्रेंड
कुछ राज्य ऐसे भी हैं, जहां पिछले आठ साल में हर पांच साल में सत्ता परिवर्तन का ये ट्रेंड बदला है। इनमें उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, केरल जैसे राज्य शामिल है। उत्तराखंड में इसी साल हुए विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने दोबारा सत्ता हासिल की है। इसके पहले साल 2000 से यहां हर पांच साल में भाजपा और कांग्रेस के बीच सत्ता की अदला-बदली होती रही थी। 2000 में उत्तराखंड की स्थापना के बाद पहली बार भारतीय जनता पार्टी की अंतरिम सरकार बनी। 2002 में हुए चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा को हराकर सत्ता हासिल की। 2007 में वापस भाजपा, 2012 में कांग्रेस ने जीत हासिल की। इसके बाद 2017 फिर से भाजपा की सरकार बनी। 2022 में भाजपा ने सरकार बनाकर सत्ता परिवर्तन का ट्रेंड बदल दिया।
इसी तरह उत्तर प्रदेश में भी हुआ। यहां भी 1989 से कुछ इसी तरह का चलन था। यहां 2007 तक तो कोई मुख्यमंत्री अपना कार्यकाल तक पूरा नहीं कर पा रहा था। 1989 में हुए चुनाव में जनता दल की जीत हुई थी। इसके बाद 1991 में हुए मध्यावधि चुनाव में भाजपा ने सत्ता हासिल कर ली। 1993 में सपा-बसपा गठबंधन की सरकार बनी। हालांकि, एक साल बाद ही बसपा ने भाजपा से गठबंधन कर लिया और मायावती मुख्यमंत्री बन गईं। 1996 में भी यही हुआ। हाल के दिनों पर नजर डालें तो 2007 में बसपा, 2012 में सपा और फिर 2017 में भाजपा ने जीत हासिल की थी। 2022 में भारतीय जनता पार्टी ने लगातार दूसरी बार जीत हासिल कर सत्ता परिवर्तन का ट्रेंड बदल दिया।
केरल में भी यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) और लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) के बीच हर पांच साल में सत्ता परिवर्तन होता रहा है। ये सिलसिला 1982 से चल रहा था। 1982 में यहां यूडीएफ की सरकार बनी थी। 1987 में एलडीएफ, 1991 में यूडीएफ, 1996 में एलडीएफ, 2001 में यूडीएफ, 2006 में एलडीएफ, 2011 में यूडीएफ की सरकार बनी और 2016 में एलडीएफ की सरकार बनी। 2021 में हुए विधानसभा चुनाव में एलडीएफ ने सत्ता में वापसी करके हर पांच साल में सत्ता बदलने का रिवाज बदल दिया।