भ्रष्टाचार और दूसरे मामलों में लिप्त पाए जाने के बाद सरकार ने तीन पुलिसकर्मियों से वीरता पदक वापस ले लिए हैं। केंद्रीय गृहमंत्रालय के एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। ये अधिकारी हैं, मध्य प्रदेश पुलिस के एएसपी धर्मेंद्र चौधरी, पंजाब पुलिस के सब-इंस्पेक्टर गुरमीत सिंह और झारखंड पुलिस के सब-इंस्पेक्टर ललित कुमार।
चौधरी को वीरता के लिए दिया गया पुलिस पदक सितंबर में, ललित कुमार से जून और गुरमीत सिंह से मई में वापस लिया गया है। अधिकारी के मुताबिक, आईपीएस बनाए गए चौधरी के फर्जी एनकाउंटर में शामिल होने पर पदक लिया गया है। वांछित अपराधी को मारने के लिए तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने उन्हें वीरता पदक प्रदान किया था। वहीं, गुरमीत सिंह को राज्य सरकार की सिफारिश पर सेवा के दौरान बहादुरी के लिए 1997 में पदक दिया गया था।
वह हत्या के एक मामले में दोषी ठहराए गए हैं और 2006 में उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। गुरमीत को बाद में नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया था। गृहमंत्रालय को उनके दोषी साबित होने की जानकारी जुलाई 2015 में मिली। वहीं ललित कुमार से भ्रष्टाचार में संलिप्त होने के लिए पदक छीना गया है।