सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे से बचाने और फेक न्यूज पर नियंत्रण करने के लिए सोशल मीडिया एप्स जैसे फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम और टेलीग्राम को ब्लॉक करने के तरीकों पर विचार कर रही है। इसके लिए सरकार ने टेलीकॉम कंपनी और इंटरनेट सर्विस (आईएसपी) से सुझाव मांगे हैं। सरकार ने ऐसा करने पर उस समय विचार किया है जब व्हाट्सएप से लोगों की सुरक्षा खतरे में पड़ती जा रही है।
भीड़ तंत्र में मारे गए ज्यादातर लोगों से जुड़ी अफवाह व्हाट्सएप के माध्यम से ही फैलाई गई थी। मामले पर सूत्रों का कहना है कि दूरसंचार विभाग (डीओटी) फेक न्यूज सहित अन्य मुद्दों पर दुनिया की बड़ी सोशल मीडिया कंपनियों से भी बात कर सकता है। विभाग ने इस पर कंपनियों से ऐसे तकनीकी तरीकों के बारे में पूछा है जिससे आईटी एक्ट धारा 69ए के तहत एप्स को ब्लॉक किया जा सके। सरकार को भीड़ तंत्र की वजह से सुप्रीम कोर्ट की कड़ी आलोचना का सामना तो करना ही पड़ा साथ ही अब फेक न्यूज के जरिए 2019 के चुनावों को प्रभावित करने की बात भी कही जा रही है।
इसी के तहत विभाग ने अब यह पहल शुरू की है। इस बारे में उसने 18 जुलाई को एक पत्र भी लिखा जिसमें उसने कहा, 'इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप, टेलीग्राम जैसे मोबाइल एप्स को इंटरनेट पर कैसे ब्लॉक किया जा सकता है। आपसे इसके संभावित विकल्प बताने की गुजारिश की जाती है।' विभान ने यह पत्र भारतीय एयरटेल, वोडाफोन इंडिया, रिलायंस जियो, आइडिया सेल्युलर के अलावा टेलीकॉम और आईएसपी इंडस्ट्री से जुड़ी संस्थाओं को भेजा है। बता दें जिस कानून के तहत इन एप्स को ब्लॉक किया जाएगा उसमें कंप्यूटर एपलीकेशन के जरिए दी जा रही जानकारी को ब्लॉक करने के निर्देश अथॉरिटीज को दिए गए हैं।
कंपनियों से ऐसी राय मांगने के लिए विभाग की ओर से लिखा गया यह दूसरा पत्र है। इसी तरह का एक पत्र 28 जून को भी भेजा गया था। अभी तक किसी ने भी इस पत्र का जवाब नहीं दिया है। विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि व्हाट्सएप ने भी परेशानी को कम करने के लिए किसी भी पोस्ट के फॉरवर्ड करने के क्रम को कम कर दिया है। लेकिन इतना काफी नहीं है। सरकार के पास भी ऐसे में इंटरनेट सर्विस बंद करने का रास्ता बचता है लेकिन यह ही एक हल नहीं है। इसी कारण दूरसंचार विभाग इन एप्स को बंद करने पर विचार कर रहा है।