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स्वतंत्रता दिवस पर मिलेगा आदिवासी कारीगरों को तोहफा, एक क्लिक पर बेच सकेंगे उत्पाद

Sun, 28 Jun 2020 08:34 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

आने वाले स्वतंत्रता दिवस के मौके पर केंद्र सरकार आदिवासी कारीगरों को बड़ा तोहफा देने जा रही है। सरकार इन कारीगरों के लिए ई-बाजार या ई-मार्केट का प्लेटफॉर्म शुरू करने जा रही है। इससे इन कारीगरों को अपने उत्पाद बेचने के लिए दर-दर भटकना नहीं पड़ेगा और वह एक क्लिक पर अपने उत्पादों की बिक्री कर सकेंगे। इस ई-मार्केट का ट्रायल 30 जुलाई से शुरू होगा जो 14 अप्रैल तक चलेगा। 
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अपने उत्पादों के साथ आदिवासी कारीगर - फोटो : पीआईबी
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विस्तार
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द ट्राइबल कोऑपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया या ट्राइफेड ( TRIFED ) के प्रबंध निदेशक प्रवीर कृष्ण ने कहा, 'हम 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर ट्राइब्स इंडिया ई-मार्ट वेबसाइट को लॉन्च करेंगे। यह वैसा ही होगा जैसे कोई व्यक्ति अमेजन या फ्लिपकार्ट जैसे बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर अपने उत्पाद बेचता है। अंतर केवल यह होगा कि यह वेबसाइट केवल आदिवासियों के लिए होगी।'

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बता दें कि सरकार ने देश भर में आदिवासियों को उनके उत्पादों का उचित मूल्य प्रदान करने के उद्देश्य से साल 1987 में जनजातीय सहकारी विपणन विकास महासंघ की स्थापना की थी। यह एजेंसी केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्रालय के तहत कार्य करती है। 

कारीगरों को मिलेगा प्रशिक्षण

कृष्ण ने कहा कि आदिवासी कारीगरों को प्रशिक्षण दिया जाएगा और उनसे खुद को वेबसाइट पर विक्रेता को रूप में पंजीकृत करने को कहा जाएगा। उन्होंने कहा, देश भर में हमारे 15 क्षेत्रीय कार्यालयों के कर्मचारी और ट्राइफेड के साथ काम करने वाले राज्य सरकार के अधिकारी इन आदिवासियों कारीगरों को प्रशिक्षित करेंगे और उन्हें इस ई प्लेटफॉर्म पर पंजीकृत होने में मदद करेंगे।

उन्होंने कहा कि इस पहल का मकसद लगभग पांच लाख आदिवासी कारीगरों को ऑनलाइन लाना है और उन्हें एक बड़े राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ना है। इस वेबसाइट पर पकड़े, चित्र, घर की सजावट के सामान, गहने और धातु शिल्प समेत 20 हजार श्रेणियों के करीब पांच लाख उत्पाद उपलब्ध होंगे। इन उत्पादों की गुणवत्ता की पूरी जांच की जाएगी और एक समिति उनका मूल्य तय करेगी।
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100 रुपये में 70 कारीगर को मिलेंगे

उन्होंने कहा कि उत्पादों की बिक्री से मिले हर 100 रुपये में से 70 रुपये आदिवासी विक्रेता के खाते में जाएंगे। कृष्ण ने बताया कि इन उत्पादों की देशभर में आपूर्ति के लिए स्थानीय संग्रह केंद्र बनाए जाएंगे। हम 30 जुलाई को लगभग पांच हजार आदिवासी कारीगरों के साथ शुरुआत करेंगे। उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री मोदी के आत्मनिर्भर भारत मिशन का एक हिस्सा है। हमारा मकसद 'गो लोकल फॉर वोकल, गो ट्राइबल' है। 

कृष्ण ने इस पहल के पीछे की अर्थव्यवस्था समझाते हुए कहा कि आदिवासी कारीगर जो शर्ट स्थानीय बाजार में 200 रुपये में बेचते हैं वही शर्ट दिल्ली में 1000 रुपये में बिकती है। ग्राहकों को सर्वश्रेष्ठ गुणवत्ता वाले जैविक (ऑर्गेनिक) उत्पाद बेचे जाएंगे। अगर ग्राहक उत्पाद से संतुष्ट नहीं है तो उसके पास 15 दिन के अंदर उत्पाद वापस करने का भी विकल्प होगा।  
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