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जीएसटी पर अपनों के विरोध को थामने में जुटी सरकार, ये है प्लान

Wed, 28 Jun 2017 05:39 AM IST
amarujala.com, Presented By: मोहित
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जीएसटी, अरुण जेटली - फोटो : self
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जीएसटी पर पीएम मोदी को अपनों का भी विरोध झेलना पड़ सकता है। एक तरफ सरकार जीएसटी लागू होने के दिन को यादगार बनाने में जुटी है। तो सरकार के अपने संगठन विरोध की रणनीति बनाने में मशगूल हैं। हालांकि संघ संगठनों की ओर से जीएसटी को लेकर उठ रहे स्वर को भांपते हुए सरकार के रणनीतिकार इसे थामने में जुट गए हैं। 
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प्रधान मंत्री के प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्र ने मंगलवार को भारतीय मजदूर संघ के नेताओं को बुलाकर न सिर्फ उनकी समस्याएं सुनी हैं बल्कि उन्हें आश्वस्त किया है कि प्रभावित लोगों को सरकार की ओर से राहत प्रदान की जाएगी। अगले दो दिनों में संघ के कुछ अन्य संगठनों के नेताओं के साथ भी सरकार के शीर्ष अधिकारियों की कई दौर की अहम बैठके होनी हैं। लघु उद्योग भारती के नेता भी बुधवार को दिल्ली पहुंच रहे हैं। 

जीएसटी की कमियों पर सरकार के साथ उनकी अहम बैठकें होनी हैं। भारतीय मजदूर संघ के राष्ट्रीय महासचिव बृजेश उपाध्याय ने अमर उजाला को बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय और वित्त मंत्री अरूण जेटली को जीएसटी से उत्पन्न होने वाली कठिनाईयों से अवगत कराया है। उम्मीद है सरकार समस्याओं का निराकरण करेगी। 
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संघ संगठनों से क्यों भयभीत है सरकार 
दरअसल लघु उद्योगों की अनदेखी को लेकर संघ के आर्थिक संगठनों ने सरकार को चेतावनी दी हुई है। यदि लघु उद्योगों की अनदेखी की गई तो संघ के स्वदेशी जागरण मंच, लघु उद्योग भारती और भारतीय मजदूर संघ सरीखे संगठन सरकार के कदम के खिलाफ खड़े होंगे। स्वदेशी जागरण मंच ने तो जीएसटी से पीएम मोदी के मेक इन इंडिया अभियान को भी बट्टा बताया है। 

बीडी उद्योग और निर्माण क्षेत्र में इसके विपरित असर पड़ने के आसार हैं। इन मामलों को लेकर सरकार के अपने संगठन विरोध में उतरें इस फजीहत से बचने के लिए सरकार के शीर्ष अधिकारी हरकत में आ गए हैं। ताकि 30 जून को जीएसटी लांचिंग के दिन माहौल को खुशनूमा पेश कर सकें। 
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मेक इन इंडिया अभियान को कैसे लगेगा जीएसटी से बट्टा 

- फोटो : Getty
भारतीय मजदूर संघ रोजगार के मामलों और मजदूरों की छीनी जा रहीं कुछ सुविधाओं को लेकर चिंतित है। तो लघु उद्योग भारती की चिंता छोटे एवं मध्यम उद्योगों को लेकर है। सरकार ने लघु उद्योगों की छूट को कम करके 20 लाख कर दिया है। पहले 10 करोड़ तक के उद्योग को लघु उद्योग की श्रेणी में कर छूट प्रदान थे। 

संघ के संगठन स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सह संयोजक अश्वनी महाजन का कहना है कि देश का लघु उद्योग ही चीन से टक्कर ले रहा है। लेकिन जीएसटी की सर्वाधिक मार लघु उद्योगों पर ही पड़ेगी। यदि लघु उद्योगों को रियायत नहीं दी गई तो इसका असर देश के रोजगार और उत्पादन पर गहरा पड़ेगा और देश का आयात बढ़ेगा। 

मंच का कहना है कि जीएसटी दर तय करने के मामले में पूरी तरह नासमझी दिखाई गई है। बीडी उद्योग का कर आधे प्रतिशत से सीधे 18 प्रतिशत कर दिया गया है। जिसके वजह से बीडी उद्योग चौपट होगा और तेंदू पत्ता एकत्रित करने वालें बेरोजगार होंगे। बीडी रोलिंग करने वालों कारीगरों की नौकरी पर भी संकट बढ़ेगा। 

महाजन का कहना है कि छोटे एवं मध्यम उद्योगों पर जारी रियायत बरकरार रहनी चाहिए। 10 करोड़ तक के उद्योग को मिलने वाली कर छूट की सीमा अब घटाकर 10 लाख कर दी गई है। यदि लघु उद्योगों से प्रश्य हटाया गया तो मेक इन इंडिया अभियान पर बट्टा लगेगा। चीन के उत्पादों का बाजार में बोलबाला बढ़ेगा। देश का आयात बढ़ेगा और उत्पादन घटेगा। दुनिया के अन्य देशों में भी छोटे उद्योगों को रियायत प्राप्त है। 
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