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मोदी 2.0 ने महज छह महीने में निपटाए तीन बड़े मामले, अब इन प्रमुख मुद्दों की तैयारी

Sun, 10 Nov 2019 02:28 AM IST
संजीव कुमार झा हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • हिंदुत्व की झोली में अभी और हैं कई मुद्दे
  • दूसरी पारी के महज छह महीने में निपटाए तीन प्रमुख मुद्दे
  • अब समान नागरिक संहिता, नई जनसंख्या नीति, धर्मांतरण विरोधी कानून बनाने की तैयारी
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मोदी सरकार 2.0 ने छह महीनों में निपटाए तीन बड़े मामले - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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मोदी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल की छह महीने की छोटी अवधि में ही दशकों पुराने तीन मुद्दों (अनुच्छेद 370, राम मंदिर और समान नागरिक संहिता) में से दो मुद्दों का हल निकाल लिया। अनुच्छेद 370 निरस्त करने के बाद शुक्रवार को अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का राह प्रशस्त हुआ। इससे पहले सरकार ने तीन तलाक को दंडनीय अपराध बनाया।
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हालांकि भाजपा की हिंदुत्व की राजनीति की झोली में अब सिर्फ समान नागरिक संहिता का मुद्दा नहीं बचा है। इससे पहले सरकार धर्मांतरण विरोधी कानून, नागरिकता संशोधन कानून और राष्ट्रीय जनसंख्या नीति को अमलीजामा पहनाने की तैयारी में है।

दरअसल वर्तमान स्थिति भाजपा के हिंदुत्व की राजनीति के अनुकूल है। लोकसभा में जहां पार्टी और राजग को प्रचंड बहुमत हासिल है, वहीं राज्यसभा में भी राजग धीरे धीरे बहुमत की ओर बढ़ रहा है। बीती सदी के नब्बे के दशक में हिंदुत्व की राजनीति का मुखर विरोध करने वाले कई विपक्षी दल नरम हिंदुत्व की राह पर हैं।
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इसी के परिणामस्वरूप उच्च सदन में बहुमत न होने के बावजूद सरकार अनुच्छेद 370 को निरस्त करने और इससे पहले तीन तलाक को दंडनीय अपराध बनाने वाले बिल को पारित करा पाई।

जारी रहेगा हिंदुत्व की राजनीति का दौर

राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त होने के बाद हिंदुत्व की राजनीति की गाड़ी की रफ्तार धीमी नहीं होगी। सरकार के पास इस राजनीति की गाड़ी को रफ्तार देने के लिए पर्याप्त मुद्दे मौजूद हैं। मसलन सरकार की रणनीति तीसरे हफ्ते से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र में धर्मांतरण विरोधी बिल के साथ नागरिकता संशोधन बिल पारित कराने की तैयारी में है।

इसके बाद सरकार के एजेंडे में नई जनसंख्या नीति तैयार करना है। अंत में सरकार देश में समान नागरिक संहिता लागू करने की ओर कदम बढ़ाएगी। खासतौर पर समान नागरिक संहिता लागू करने में सरकार के समक्ष कोई अड़चन नहीं है। सुप्रीम कोर्ट में जज रहते अपने एक फैसले में जस्टिस विक्रमजीत सिंह सहित एक अन्य जज ने समान नागरिक संहिता की वकालत की थी।

मथुरा-काशी पर पेच

हिंदूवादी संगठनों के एजेंडे में अयोध्या में राम मंदिर के साथ मथुर और काशी में भी मंदिर निर्माण की बात थी। हालांकि वर्ष 1991 में संसद ने एक बिल को मंजूरी दी थी जिसमें 1947 के बाद धार्मिक स्थलों की यथास्थिति बरकरार रखने की बात कही गई है। इसमें तब अयोध्या को शामिल नहीं किया गया था
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