सूत्रों ने कहा, भारत प्रस्तावित करतारपुर कॉरिडोर सालभर और हर समय खुला रखने के पक्ष में है। जिससे भारतीयों को पाकिस्तान में धर्मस्थल तक आसानी से आने-जाने की सुविधा मिल सके। सूत्रों ने कहा कि श्रद्धालुओं की संख्या पर कोई प्रतिबंध नहीं होना चाहिए और पाकिस्तान में भारतीय नागरिकों को आसान राजनयिक मदद भी उपलब्ध होनी चाहिए।
सूत्रों ने पाकिस्तान को आइना दिखाते हुए कहा, पाकिस्तान में भारतीय श्रद्धालुओं को उत्पीड़न सहना पड़ता है और खालिस्तान की मांग वाले पोस्टर देखने पड़ते हैं। उन्हें राजनयिक अधिकारियों तक पहुंचने नहीं दिया जाता। इतने विकट हालात के बावजूद सिख श्रद्धालु इस यात्रा को करते रहे हैं। कॉरिडोर निर्माण के प्रस्ताव का मकसद उनकी परेशानी को कम करना है।
बता दें कि केंद्रीय कैबिनेट की तरफ से करतारपुर साहिब कॉरिडोर निर्माण को हरी झंडी दिखाए जाने के बाद विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा था कि भारत ने पाकिस्तानी सरकार से संपर्क साधा है और उन्हें सिख समुदाय की भावनाओं से अवगत कराते हुए कॉरिडोर निर्माण की अपील की है।
रवीश के इस बयान के कुछ घंटे बाद इस्लामाबाद में पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा था कि पाकिस्तान पहले ही बाबा गुरु नानक की 550वीं जयंती पर करतारपुर कॉरिडोर खोलने के निर्णय की जानकारी भारत को दे चुका है।
कुरैशी ने ये भी कहा था कि प्रधानमंत्री (पाकिस्तान) इमरान खान 28 नवंबर को करतारपुर में सुविधाओं के निर्माण की नींव रखने आ रहे हैं। हम इस मंगल मौके पर सिख समुदाय का स्वागत करते हैं। इस विकास से दो पड़ोसियों के बीच तनाव कम करने में मदद मिलेगी।
इसके बाद पाकिस्तान के विदेश विभाग के प्रवक्ता मोहम्मद फैसल ने भी कहा था कि प्रधानमंत्री इमरान खान सभी मुद्दों पर वार्ता के लिए लिखित प्रस्ताव भेज चुके हैं, जिसमें करतारपुर भी है। लेकिन भारत आगे बढ़ने से इंकार करता रहा है। फैसल ने कहा, पाकिस्तान अभी तक भारतीय सिखों को इस धार्मिक समारोह (गुरु नानक जयंती) में शामिल होने के लिए 3838 वीजा उपलब्ध करा चुका है।