दिल्ली में लाल किला पर प्रदर्शनकारियों का तांडव देखकर लुटियन जोन और केंद्रीय सचिवालय के गलियारों में किसान आंदोलन की इतिश्री की भविष्यवाणी होने लगी थी। अब इसके नतीजे सामने आने लगे हैं। केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने इसे देश के स्वाभिमान पर चोट का संदेश देना शुरू कर दिया है। वह आज दिल्ली के अस्पतालों में घायल पुलिस और सुरक्षा बल के जवानों से भी मिले।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस दिशा में कदम बढ़ा दिया है। बुधवार रात से ही गाजीपुर बार्डर पर किसानों की बिजली काट दी गई थी। आज उत्तर प्रदेश प्रशासन ने सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को किसानों के आंदोलन के बाबत कदम उठाने का निर्देश दिया है। उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में पुलिस ने बुधवार रात से ही किसानों के प्रदर्शन स्थल खाली कराने शुरू कर दिए हैं। गाजियाबाद के जिलाधिकारी ने भी किसानों को धरनास्थल, सड़क खाली करने की चेतावनी दे दी है।
इसी तरह की सूचना हरियाणा से भी आ रही है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने भी जिला प्रशासन को निर्देश देना शुरू किया है। भाजपा और आरएसएस के संगठनों ने भी किसानों के धरना-प्रदर्शन खत्म कराने के प्रयास को आगे बढ़ा दिया है। कुल मिलाकर कार्रवाई किसानों से धरना प्रदर्शन स्थल खाली कराने की तरफ बढ़ रही है।
दिल्ली पुलिस ने किसान संगठनों के नेताओं को नोटिस भेजना, नोटिस उनके टेंट पर चस्पा करना तथा पूछताछ के लिए बुलाने का समन भेजना शुरू कर दिया है। कई हजार सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रही हैं और चेहरों की पहचान की जा रही है। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच और स्पेशल सीपी के अधीन जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है। केन्द्रीय सचिवालय और गृह मंत्रालय सूत्रों की मानें तो किसान आंदोलन अब जल्द ही एनसीआर से खत्म हो जाएगा। सिंघु बॉर्डर, टीकरी बॉर्डर और गाजीपुर बॉर्डर पर केन्द्रीय अर्ध सैनिक बलों की अतिरिक्त कंपनियों की तैनाती भी शुरू हो गई है।
40 किसान संगठनों के नेता ने बुधवार को बैठक की। आज भी उनमें मंत्रणा हुई। गुरनाम सिंह चढ़ूनी, राजेवाल, लखूवाल सभी आंदोलन जारी रखने के लिए दृढ़ संकल्प हैं। योगेन्द्र यादव की भी मंशा यही है। भाकियू (असली, अराजनैतिक) के प्रमुख चौधरी हरपाल सिंह कहा कि हमारे इरादे चट्टान की तरह बुलंद हैं। हम सरकार की दमनकारी नीतियों के आगे झुकने वाले नहीं हैं।