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आंदोलनों से निपटने के योगी स्टाइल से नहीं डरेंगे किसान, जारी रखेंगे कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन

Thu, 28 Jan 2021 06:01 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

योगी आदित्यनाथ अपने तरीके से आंदोलनों से निपटने के लिए जाने जाते रहे हैं। बागपत में धरना कर रहे किसान आंदोलनकारियों को भी उसी स्टाइल में धरना स्थल से हटाने का आरोप लग रहा है...
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गाजीपुर बॉर्डर पर बढ़ी सुरक्षा - फोटो : अमर उजाला
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योगी आदित्यनाथ अपने तरीके से आंदोलनों से निपटने के लिए जाने जाते रहे हैं। बागपत में धरना कर रहे किसान आंदोलनकारियों को भी उसी स्टाइल में धरना स्थल से हटाने का आरोप लग रहा है। लेकिन किसानों ने कहा है कि वे योगी आदित्यनाथ सरकार की सख्ती से नहीं डरेंगे और सरकार के बल प्रयोग के बावजूद कृषि कानूनों के निरस्त कराने तक आंदोलन जारी रखेंगे।

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आरोप है कि दिल्ली-सहारनपुर हाईवे पर बागपत में धरना दे रहे किसानों को पुलिस ने देर रात जबरदस्ती हटा दिया। इसके लिए लाठी चार्ज भी किया गया। हालांकि, प्रशासन ने बल प्रयोग की बात से इनकार किया है।

ऑल इंडिया किसान संघर्ष समन्वय समिति के नेता डॉ. आशीष मित्तल ने अमर उजाला से कहा कि योगी सरकार ने किसानों का धरना हटाने के लिए बल प्रयोग किया है। शांतिपूर्ण तरीके से धरना दे रहे किसानों पर बल प्रयोग करना दुर्भाग्यपूर्ण है। वे सरकार की इस दमनपूर्ण कार्रवाई का विरोध करते हुए अपना आंदोलन जारी रखेंगे। अगर सरकार उनकी गिरफ्तारी करने की कोशिश करती है तो सभी किसान गिरफ्तारी देने के लिए तैयार हैं। इसके लिए शीर्ष किसान नेताओं की शीघ्र ही एक बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें आंदोलन को आगे बढ़ाने पर निर्णय किया जाएगा।
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किसान नेताओं ने कहा है कि सरकार का किसानों पर जोर-जबरदस्ती करना बेहद चिंताजनक और शर्मनाक है। यूपी सरकार इसके पहले भी विभिन्न आंदोलनों से निपटने के लिए इसी तरह के तरीके का इस्तेमाल करती रही है। कई मौकों पर प्रदर्शनकारियों से पैसा वसूल कर संपत्ति के नुकसान की भरपाई की गई है। लेकिन किसानों ने कहा है कि उनका आंदोलन हमेशा से शांतिपूर्ण रहा है और इस दौरान किसी तरह की क्षति नहीं हुई है। लेकिन इसके बाद भी अगर सरकार आंदोलनकारियों से कठोरता से पेश आती है तो वे इसका सामना करने के लिए तैयार हैं।

वहीं, भारतीय किसान संघ के नेता हरपाल सिंह डागर ने कहा है कि देश का संविधान लोगों को अपनी बात रखने की आजादी देता है। लेकिन इसके लिए दूसरों के अधिकारों का हनन नहीं किया जाना चाहिए। हाल के दिनों में यह प्रवृत्ति बढ़ रही है कि लोग लंबे समय तक मार्ग अवरुद्ध करके यातायात रोक देते हैं जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। यही कारण है कि जैतपुर में और कई अन्य जगहों पर लोग खुद सामने आकर आंदोलन को खत्म कराने के लिए पहल करने लगे हैं।

उन्होंने कहा कि अब जब सरकार ने कानूनों को निलंबित कर दिया है, किसानों को आंदोलन समाप्त कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि कृषि कानूनों में उचित संशोधन करना चाहिए, लेकिन इसके लिए अब किसानों को आंदोलन की बजाय बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए। 

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