पुराने कानूनों को बदलने की तैयारी।
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सरकार अप्रासंगिक हो चुके कानूनों में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। इसमें मौजूदा समय के मुताबिक आईपीसी, सीआरपीसी और साक्ष्य कानून सहित राजनीतिक दुरुपयोग पर रोक लगाने के लिए राजद्रोह कानून के प्रावधानों को बदला जाएगा। बदलाव से पूर्व गृह मंत्री अमित शाह ने देश के चुनिंदा विधि विश्वविद्यालयों, पूर्व जजों, सांसदों और कानूनविदों से सुझाव मांगे हैं। सुझाव मिलने के बाद कानून में बदलाव किया जाएगा।
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने देशद्रोह और राजद्रोह कानून से जुड़े प्रावधानों पर बदलाव की जरूरत की ओर इशारा किया था। राष्ट्रदोह कानून के मामले में सरकार ने इस सप्ताह के अंत तक सुप्रीम कोर्ट को अपनी राय से अवगत कराने की बात कही है। सरकार ने हाल ही में बंदी शिनाख्त कानून में भी संशोधन किया है। इसके तहत अब गिरफ्तार व्यक्ति की हर तरह की मैपिंग का रास्ता तैयार किया गया है।
समान नागरिक संहिता से नहीं जुड़े हैं भावी बदलाव
समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए कानून में बदलाव के सवाल पर सूत्र ने बताया कि भावी बदलावों का इससे कोई लेनादेना नहीं है। वह इसलिए कि समान नागरिक संहिता लागू करने को लेकर कोई बड़ा सांविधानिक अड़चन नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के अलावा कई हाईकोर्ट समय-समय पर इसकी प्रत्यक्ष और परोक्ष वकालत कर चुके हैं।
राजद्रोह कानून में ठोस बदलाव करेगी सरकार
देश में राष्ट्रद्रोह और राजद्रोह कानून और इसके इस्तेमाल पर दशकों से सवाल उठते रहे हैं। इसके दुरुपयोग की गूंज शीर्ष अदालत तक पहुंची है। सत्ताधारी दल विरोध की आवाज और मतभेद को कुचलने के लिए इस कानून के दुरुपयोग के आरोप लगते रहे हैं। मोदी सरकार इस कानून में भी बदलाव के तैयारी कर रही है।
1486 कानूनों को खत्म कर चुकी है मोदी सरकार
मोदी सरकार के करीब आठ साल के कार्यकाल के पहले छह साल में अप्रासंगिक कानूनों को खत्म करने की रफ्तार बेहद तेज थी। बीते दो सालों में यह रफ्तार धीमी हुई है। मोदी सरकार ने अब तक 1486 कानूनों को खत्म कर चुकी है, जो अप्रासंगिक हो चुके थे। सूत्रों का कहना है अप्रासंगिक कानूनों को निरस्त करने के साथ ही जरूरी सुधारों पर भी सख्ती से आगे बढ़ने पर विचार हुआ है।