सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री के मुताबिक अगर टीआरएस, बीजेडी और वाईएसआर (कुल 15 सदस्य) का साथ मिल जाए तो उच्च सदन में बहुमत के रोड़े को हटाया जा सकता है। इन दलों को बिल को लेकर कोई बड़ी आपत्ति नहीं है। ऐसे में फैसला किया गया है कि विधानसभा चुनाव संपन्न होते ही इन दलों के नेताओं से संपर्क साध कर इन्हें बिल के समर्थन के लिए राजी किया जाए। नाराज सहयोगी जदयू, एजीपी, बीपीएफ, एनपीएफ और एसडीएफ को भी मनाया जाए।
अगर ये दल नहीं मानते तो बहुमत हासिल करने केलिए इन्हें उच्च सदन में मतदान के दौरान अनुपस्थित रहने के लिए मनाया जाएगा। वैसे भी बहुमत के अभाव के बावजूद तीन तलाक बिल और अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के फैसले पर राज्यसभा की मुहर लगाने में कामयाब होने के बाद सरकार नागरिकता बिल को भी पारित होने को लेकर आश्वस्त है।
क्या है संख्या बल
इस समय राज्यसभा में सदस्यों की संख्या 240 है। बिल पारित कराने के लिए सरकार को 121 सदस्यों के समर्थन की जरूरत है। राजग के सदस्यों की संख्या 111 है। इनमें जदयू के छह, एजीपी, बीपीएफ, एनपीएफ और एसडीएफ के 1-1 सदस्य शामिल हैं। भाजपा को इसके अतिरिक्त चार निर्दलीयों और तीन मनोनीत सदस्यों का समर्थन हासिल है। ऐसे में अगर सरकार को टीआरएस, बीजेडी और वाईएसआर कांग्रेस का साथ हासिल हो जाए तो जदयू सहित पूर्वोत्तर के कुछ दलों के विरोध का असर बिल पर नहीं पड़ेगा।