उद्योग नहीं पेयजल पहली प्राथमिकता
पीने के लिए पानी की उपलब्धता करना पहली प्राथमिकता है। यह बात कहते हुए राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने कहा कि भूजल के अंधाधुंध निकास की इजाजत के बजाय उद्योगों व प्राधिकरणों को अपने उपयोग के लिए वैकल्पिक तरीकों का पता लगाना चाहिए।
एनजीटी अध्यक्ष जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की पीठ ने यह बात औद्योगिक उत्पादक संघ की एक याचिका का निस्तारण करते हुए कही। संघ ने गाजियाबाद निवासी शैलेश सिंह की याचिका के खिलाफ अपना प्रत्यावेदन दायर किया था। सिंह ने गाजियाबाद में अवैध रूप से चल रहे उद्योगों को बंद करने की मांग की थी।
द्वारका में ध्वनि प्रदूषण रोकने के आदेश, शोर रहित पर्यावरण को बताया जीवन के मूल अधिकार का हिस्सा
राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी (डीपीसीसी) को द्वारका सेक्टर-3 के आवासीय क्षेत्र के आसपास में ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया है। जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने डीपीसीसी को कार्रवाई करते हुए दो महीने के अंदर विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने को भी कहा है।
न्यायाधिकरण ने यह आदेश द्वारका निवासी सपना ममतानी और अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिका में इन सभी ने द्वारका सेक्टर-3 में दिल्ली पब्लिक स्कूल, शांति गार्डन और द्वारका गार्डन के आसपास बहुत ज्यादा ध्वनि प्रदूषण होने की शिकायत की थी।
इससे पहले एनजीटी ने इस मामले में दिल्ली पुलिस जिला प्रशासन को भी फटकार लगाते हुए कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी थी। इस मामले में अगली सुनवाई 23 जनवरी, 2020 को की जाएगी।