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साफ हवा में सांस लेना सभी नागरिकों का अधिकार: एनजीटी

Sat, 19 Oct 2019 03:44 AM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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एनजीटी
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राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने ताजी हवा में सांस लेना हर नागरिक का अधिकार बताया है। एनजीटी ने यह बात दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम की उस याचिका को खारिज करते हुए कही, जिसमें सार्वजनिक क्षेत्र की इस कंपनी ने दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) के तहत डीजल जनरेटर के इस्तेमाल पर लगाए गए प्रतिबंध से छूट मांगी थी।

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बता दें कि दिल्ली एनसीआर में सर्दियों के आगमन के साथ ही हवा की गुणवत्ता में आई भारी गिरावट के बाद पर्यावरणीय प्रदूषण (नियंत्रण व रोकथाम) प्राधिकरण (ईपीसीए) ने 15 अक्तूबर से ग्रैप लागू करते हुए कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए गए थे।

एनजीटी अध्यक्ष जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने पेश याचिका में कंपनी ने कहा था कि उसका दायित्व सभी नागरिकों को बिजली वितरित करना है। लेकिन तकनीकी अड़चनों के चलते पूरे क्षेत्र में विद्युत वितरण करने को लेकर कंपनी की अपनी सीमाएं हैं।
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इसके चलते उसे कई जगह विद्युत वितरण के लिए डीजल जनरेटरों का उपयोग करना पड़ता है। याचिकाकर्ता के मुताबिक, कंपनी ने यह मुद्दा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सामने रखा था, जिसे ईपीसीए के पास भेज दिया गया था। ईपीसीए ने भी कंपनी की याचिका को ठुकरा दिया था।

हालांकि पीठ ने कंपनी की दलीलों के बावजूद ग्रैप लागू करने के आदेश में किसी तरह की खामी मानने से इंकार कर दिया। पीठ ने कहा, यह कदम बेशक पर्यावरण और आम नागरिक के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए आवश्यक है। यदि याचिकाकर्ता विद्युत सप्लाई नहीं कर सकता, तो उसे इसके लिए कानून के दायरे में नए तरीके तलाशने चाहिए। ताजी हवा में सांस लेना नागरिकों का अधिकार है और इस अधिकार में किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा।

उद्योग नहीं पेयजल पहली प्राथमिकता

pollution - फोटो : pixa

उद्योग नहीं पेयजल पहली प्राथमिकता

पीने के लिए पानी की उपलब्धता करना पहली प्राथमिकता है। यह बात कहते हुए राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने कहा कि भूजल के अंधाधुंध निकास की इजाजत के बजाय उद्योगों व प्राधिकरणों को अपने उपयोग के लिए वैकल्पिक तरीकों का पता लगाना चाहिए।

एनजीटी अध्यक्ष जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की पीठ ने यह बात औद्योगिक उत्पादक संघ की एक याचिका का निस्तारण करते हुए कही। संघ ने गाजियाबाद निवासी शैलेश सिंह की याचिका के खिलाफ अपना प्रत्यावेदन दायर किया था। सिंह ने गाजियाबाद में अवैध रूप से चल रहे उद्योगों को बंद करने की मांग की थी।
 
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द्वारका में ध्वनि प्रदूषण रोकने के आदेश

लाउडस्पीकर - फोटो : अमर उजाला

द्वारका में ध्वनि प्रदूषण रोकने के आदेश, शोर रहित पर्यावरण को बताया जीवन के मूल अधिकार का हिस्सा


राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी (डीपीसीसी) को द्वारका सेक्टर-3 के आवासीय क्षेत्र के आसपास में ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया है। जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने डीपीसीसी को कार्रवाई करते हुए दो महीने के अंदर विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने को भी कहा है।

न्यायाधिकरण ने यह आदेश द्वारका निवासी सपना ममतानी और अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिका में इन सभी ने द्वारका सेक्टर-3 में दिल्ली पब्लिक स्कूल, शांति गार्डन और द्वारका गार्डन के आसपास बहुत ज्यादा ध्वनि प्रदूषण होने की शिकायत की थी।

इससे पहले एनजीटी ने इस मामले में दिल्ली पुलिस जिला प्रशासन को भी फटकार लगाते हुए कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी थी। इस मामले में अगली सुनवाई 23 जनवरी, 2020 को की जाएगी। 
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