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...तो 1 अप्रैल नहीं, 1 जनवरी से शुरू होगा वित्त वर्ष

Thu, 07 Jul 2016 03:17 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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अप्रैल से मार्च वाले वर्तमान वित्त वर्ष में बदलाव की जरूरत और संभाव्यता पर सरकार ने पूर्व आर्थिक सलाहकार, शंकर आचार्य की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया है। कमेटी को इस साल 31 दिसंबर तक रिपोर्ट देने को कहा गया है।
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वित्त मंत्रालय से जारी एक बयान के मुताबिक, इस कमेटी में पूर्व कैबिनेट सचिव के एम चंद्रशेखर, तमिलनाडु के पूर्व वित्त सचिव पीवी राजारमन और सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च के सीनियर फेलो राजीव कुमार को सदस्य बनाया गया है। अभी देश में अप्रैल से मार्च तक का वित्त वर्ष है।

अगर सरकार वित्त वर्ष में बदलाव करती है तो नया वित्त वर्ष अप्रैल से मार्च की जगह जनवरी से दिसंबर तक हो जाएगा। ऐसा होने पर वर्तमान जीवन में काफी-कुछ बदल जाएगा। जिसमें सैलरी से लेकर आयकर रिटर्न्स तक सभी कुछ शामिल है। इससे पूरी बजट प्रक्रिया में बदलाव आ जाएगा।
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सरकार ने शंकर आचार्य कमेटी का गठन किया

अगर भारत में वित्त वर्ष में बदलाव होता है तो ये भी उन देशों में शुमार हो जाएगा जहां कलेंडर ईयर मॉडल यानी 'जनवरी से दिसंबर' वाला नियम लागू हैं। केंद्रीय खुफिया एजेंसी की वेबसाइट के आंकड़ों के मुताबिक चीन, ब्राजील और रूस में इस ग्रुप में हैं।

भारत वित्त वर्ष को लेकर अब तक ब्रिटिश मॉडल को अपनाता रहा है, जो एक अप्रैल से शुरू होता है। कई और बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश कलेंडर ईयर का पालन नहीं करते। अमेरिकी वित्तीय वर्ष की शुरूआत पहली अक्टूबर से होती है, जबकि जापान और दक्षिण अफ्रीका अप्रैल से मार्च के ही फॉर्मूले को अपनाते हैं।

केंद्र सरकार की ओर से बनाई गई कमेटी को लेकर अधिकारियों ने बताया कि ये जानने की कोशिश की जाएगी क्या वित्त वर्ष में बदलाव की संभावना है। मंत्रालय की ओर से कहा गया कि कमेटी वर्तमान वित्त वर्ष के दौरान जरूरी तिथियों पर होने वाले असर, इसके फायदे-नुकसान की जांच करेगी।
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