जल्द ही कम आयु में मस्तिष्क आघात के कारण पता चल सकेंगे। केंद्र सरकार ने देश के 50 अस्पतालों को मिलाकर राष्ट्रीय स्ट्रोक रजिस्ट्री कार्यक्रम तैयार किया है, जिसके तहत अस्पताल आधारित डाटा एकत्रित किया जा रहा है। इसके अलावा, आबादी में स्ट्रोक की व्यापकता जानने के लिए अलग से एक रजिस्ट्री प्रणाली विकसित की है। सरकार ने अलग अलग राज्यों में अस्पतालों को रजिस्ट्री के लिए चुना है जो अपने यहां भर्ती मरीजों की पूरी हिस्ट्री साझा कर रहे हैं। अब तक 30 अस्पताल तीन साल में भर्ती मरीजों का डाटा साझा कर चुके हैं, जिसका भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद की टीम अध्ययन करेगी। इससे बीमारी के कारणों के अलावा सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों के बारे में भी पता चलेगा।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि रजिस्ट्री के जरिये ऑनलाइन जानकारी भेजने को लेकर सभी अस्पतालों में प्रशिक्षण कराए गए हैं। इनमें वह अस्पताल भी शामिल हैं जो आयुष्मान भारत योजना के तहत स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे हैं। 50 में से 47 अस्पतालों ने जानकारी देना शुरू कर दिया है। साल 2020 से 2022 तक की पूरी जानकारी प्राप्त हुई है। इसकी समीक्षा आईसीएमआर और नेशनल सेंटर फॉर डिजीज इंफॉर्मेटिक्स एंड रिसर्च के शोधकर्ता कर रहे हैं।
यूपी सहित इन राज्यों में आबादी की निगरानी
आईसीएमआर के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने बताया कि अस्पतालों के अलावा सरकार ने आबादी के स्तर पर भी स्ट्रोक के मुख्य कारणों को पता लगाना शुरू किया है। उत्तर प्रदेश सहित देश के पांच राज्यों में पायलट प्रोजेक्ट संचालित है। यूपी के वाराणसी में जनसंख्या आधारित स्ट्रोक रजिस्ट्री को स्थापित किया है। इसी तरह राजस्थान के कोटा, असम के कछार, तमिलनाडु के तिरुनेलवेली और ओडिशा के भुवनेश्वर में पीबीएसआर बनाए हैंैं। इन सभी केंद्रों के कर्मचारियों का हाल ही में प्रशिक्षण पूरा हुआ।
हर साल 1.85 लाख स्ट्रोक के मामले
भारत में ब्रेन स्ट्रोक मृत्यु का दूसरा सबसे आम कारण है। नई दिल्ली एम्स की वरिष्ठ डॉ. मंजरी त्रिपाठी बताती हैं कि देश में हर साल लगभग 1.85 लाख स्ट्रोक के मामले सामने आते हैं। यानी हर 40 सेकंड में एक स्ट्रोक होता है। इतना ही नहीं, हर चार मिनट में स्ट्रोक से एक मौत होती है। इनके अलावा मेडिकल जर्नल लैंसेट कमीशन की एक रिपोर्ट बताती है कि स्ट्रोक से 2050 तक दुनियाभर में हर साल एक करोड़ लोगों की मौत हो सकती है। 30 साल तक की उम्र में स्ट्रोक आने वाले मामले भी 50 फीसदी से ज्यादा बढ़ सकते हैं।
ब्रेन स्ट्रोक यानी मस्तिष्क आघात तब होता है जब मस्तिष्क को रक्त की आपूर्ति अवरुद्ध हो जाती है। इससे मस्तिष्क को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती हैं और कोशिकाएं मरने लगती हैं। डॉक्टरों के अनुसार, ब्रेन स्ट्रोक को रोका जा सकता है। इस बीमारी की तत्काल पहचान आवश्यक है, क्योंकि ब्रेन स्ट्रोक के प्रत्येक मरीज में सेकंड दर सेकंड मस्तिष्क आघात का खतरा बढ़ जाता है।