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जाट सांसदों-विधायकों के जरिए किसान आंदोलन को साधने की कोशिश

Wed, 17 Feb 2021 02:37 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, नई दिल्ली।

सार

  • खाप और आंदोलनरत किसान परिवारों को साधने के लिए मांगा रोडमैप
  • शाह-नड्डा की यूपी, हरियाणा, राजस्थान के जाट बिरादरी के सांसदों, विधायकों के साथ मैराथन बैठक
  • तोमर, बालियान ने भी बैठक में शिरकत, कई संभावनाओं पर किया गया विचार
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किसान आंदोलन - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कृषि कानूनों के खिलाफ बीते 83 दिनों से जारी किसान आंदोलन को साधने की कोशिश में भाजपा और मोदी सरकार अचानक एक बार फिर सक्रिय हुई है।

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इस क्रम में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और गृहमंत्री अमित शाह ने पश्चिमी यूपी, राजस्थान, हरियाणा से जाट बिरादरी के सांसदों-विधायकों को अपनी बिरादरी को साधने की जिम्मेदारी सौंपी है।

यह जिम्मेदारी भाजपा मुख्यालय में आयोजित रात्रिभोज के दौरान सौंपी गई। दोनों नेताओं ने सांसदों-विधायकों से अपनी बिरादरी को साधने के लिए तीन-चार दिन के अंदर रोडमैप तैयार करने का भी निर्देश दिया है।
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पार्टी सूत्रों के मुताबिक, बैठक को मुख्य रूप से शाह ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि जाट बिरादरी के सांसद, विधायक और दूसरे नेता अलग-अलग खापों और आंदोलनरत किसान के परिजनों से मुलाकात करें।

इस दौरान उन्हें बताएं कि कृषि कानून किसानों के हित में हैं। यह आंदोलन किसानों का नहीं है, बल्कि वाम संगठन की भाजपा की विचारधारा के खिलाफ छेड़ी गई जंग है। शाह ने बैठक में शामिल दस सांसदों, 26 विधायकों और करीब एक दर्जन जाट नेताओं को खापों और आंदोलनकारी किसानों को साधने का एक विस्तृत रोडमैप तैयार करने का निर्देश दिया है।

भाजपा मुख्यालय में डिनर के दौरान हुई इस बैठक में कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान भी उपस्थित थे। बैठक में बताया गया कि किसान आंदोलन में कुछ बाहरी तत्व भी सक्रिय हैं।

इसके अलावा इस आंदोलन को खालिस्तान ग्रुपों के अलावा कट्टर वामपंथी संगठनों की पूरी मदद मिल रही है। खासतौर से जाट बहुल इलाकों में इस आशय का संदेश घर-घर पहुंचाने की जरूरत है।

सूत्रों के मुताबिक, बैठक में शाह ने यह भी कहा कि अगर इस आंदोलन में ऐसे तत्वों की घुसपैठ नहीं होती तो सरकार के कानूनों को डेढ़ साल के लिए स्थगित करने और सर्वपक्षीय कमेटी के गठन के प्रस्ताव के बाद आंदोलन खत्म हो गया होता।

किसान पंचायतों के दौर से चिंता
बैठक में गणतंत्र दिवस के बाद यूपी, हरियाणा, राजस्थान में लगातार हो रही किसान पंचायत को ले कर भी चर्चा हुई। पार्टी नेतृत्व और सरकार आंदोलन के जाट बिरादरी तक गहरे तक पहुंच जाने से चिंतित है।

बैठक के दौरान इन किसान पंचायतों के संदर्भ में फीडबैक लिया गया। केंद्रीय नेताओं ने इन पंचायतों के जमीनी असर की भी जानकारी ली। बैठक में रणनीति बनी कि खासतौर से जाट बिरादरी को सही स्थिति की जानकारी देना जरूरी है। यही कारण है कि इस बिरादरी से ही जुड़े नेताओं को इस आशय की जिम्मेदारी सौंपी गई।
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आंदोलन के विस्तार की कोशिशों पर भी चर्चा
इस दौरान आंदोलनरत किसान संगठनों के आंदोलन को अन्य राज्यों में विस्तार देने की कोशिशों पर भी चर्चा हुई। दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलनकारी किसान संगठनों की घटती संख्या के बाद किसान संगठनों ने आंदोलन को विस्तार देने केलिए गुजरात, मध्यप्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार के किसान संगठनों से संपर्क साधा है। किसान संगठनों की कोशिश 18 फरवरी को प्रस्तावित रेल रोको आंदोलन के जरिये सरकार को अपनी ताकत दिखाने की है।

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