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परिसीमन विधेयक: सरकार की नई कोशिश, दलों को साधने की कवायद तेज; क्या मानसून सत्र में मिलेगी मंजूरी?

Fri, 17 Jul 2026 11:28 PM IST
निर्मल कांत पीटीआई, नई दिल्ली।

सार

केंद्र सरकार महिला आरक्षण से जुड़े परिसीमन विधेयक को संसद के मानसून सत्र में फिर लाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए वह अलग-अलग दलों का समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है। विपक्ष के विरोध के बीच सरकार को उम्मीद है कि बदले राजनीतिक हालात से इस बार विधेयक को मंजूरी मिल सकती है। पढ़िए रिपोर्ट-
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संसद - फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
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केंद्र सरकार संसद के मानसून सत्र में महिला आरक्षण से जुड़े परिसीमन विधेयक को फिर से आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है। इसके लिए सरकार अलग-अलग दलों से सहमति बनाने में जुटी है।
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सूत्रों के अनुसार, सरकार यह भरोसा दिलाने की कोशिश कर रही है कि परिसीमन के बाद सभी राज्यों में लोकसभा की सीटें बराबर अनुपात में 50 प्रतिशत तक बढ़ाई जाएंगी। सरकार का मकसद इसी भरोसे के जरिये इस विधेयक को लेकर राजनीतिक दलों की आशंकाओं को दूर करना है। राज्यसभा में सरकार के पास विधेयक पारित कराने के लिए पर्याप्त संख्या के करीब समर्थन है। लेकिन लोकसभा में इसे मंजूरी दिलाने के लिए उसे अभी और सांसदों के समर्थन की जरूरत है।

महिला आरक्षण से जुड़े परिसीमन विधेयक को बजट सत्र में लोकसभा में जरूरी समर्थन नहीं मिल पाया था, इसलिए वह पारित नहीं हो सका। अब तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) में हुई अंदरूनी टूट और बदले राजनीतिक हालात के बाद सरकार को उम्मीद है कि इस बार विधेयक के लिए ज्यादा समर्थन मिल सकता है।
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विपक्ष ने सरकार के दावे पर क्या कहा?
कांग्रेस का कहना है कि सरकार के पास संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए जरूरी संख्या नहीं है। पार्टी नेता जयराम रमेश ने कहा कि विपक्षी दल अब भी एकजुट हैं और सरकार लोकसभा में जरूरी आंकड़े से काफी दूर है।

दूसरे संविधान संशोधन विधेयक पर फैसला क्यों टला?
वहीं, संविधान संशोधन से जुड़े एक अन्य विधेयक पर बनी संयुक्त संसदीय समिति ने भी शुक्रवार को अपनी रिपोर्ट को मंजूरी देने का फैसला टाल दिया। समिति ने कहा कि इस पर और चर्चा और अलग-अलग पक्षों से बातचीत की जरूरत है।

किस विधेयक पर हो रही है चर्चा?
समिति की अध्यक्ष अपराजिता सारंगी ने बताया कि रिपोर्ट को फिलहाल लंबित रखा गया है। इस विधेयक में गंभीर आपराधिक मामलों में 30 दिन तक गिरफ्तार या हिरासत में रहने पर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री को पद से हटाने का कानूनी प्रावधान करने की बात कही गई है। विपक्षी दल इस संविधान संशोधन विधेयक का विरोध कर रहे हैं। हालांकि, भाजपा विरोधी कुछ दलों के सदस्य समिति की बैठकों में शामिल होकर चर्चा कर रहे हैं।

रिपोर्ट को मंजूरी देने से क्यों रोका गया?
अपराजिता सारंगी ने कहा कि समिति में रखी गई पांच सिफारिशों पर चर्चा शुरू हुई तो सभी सदस्यों ने महसूस किया कि विधेयक पर और विचार-विमर्श और अधिक पक्षों से सलाह लेने की जरूरत है। इसलिए रिपोर्ट को अभी मंजूरी नहीं दी गई।

उन्होंने कहा कि समिति ने 27 राजनीतिक दलों को दो पत्र भेजे थे। इनमें से पांच दलों ने अपने सुझाव दिए। लेकिन वे चर्चा में शामिल नहीं हुए। उन्होंने कहा कि सरकार सभी को साथ लेकर चलना चाहती है। कई दलों ने माना है कि विधेयक का असर देश पर दूरगामी होगा।

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किन विधेयकों पर हुई चर्चा?
समिति ने शुक्रवार को संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025, जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025 और केंद्र शासित प्रदेश सरकार (संशोधन) विधेयक, 2025 पर गृह मंत्रालय के अधिकारियों के विचार भी सुने। 
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समिति की बैठक के एजेंडे में मसौदा रिपोर्ट पर विचार करना और उसे मंजूरी देना शामिल था। विपक्ष के एक सदस्य ने बाद में बताया कि रिपोर्ट को टालने का फैसला सिफारिशों पर मतदान के दौरान लिया गया। संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होगा।
 
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