फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अब सड़क हादसे के पीड़ितों को मिलेगी 10 गुना ज्यादा मुआवजा राशि

Sat, 12 May 2018 04:37 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
विज्ञापन

सरकार ने फैसला किया है कि सड़क हादसे का शिकार होने वाले पीड़ितों को दी जाने वाली मुआवजा राशि 10 गुना बढ़ा दी जाएगी। यानी अब हादसे में मारे गए व्यक्ति के परिवार, घायलों और दुर्घटना में अपने अंग गंवाने वालों और मामूली रूप से घायल लोगों को भी 10 गुना ज्यादा मुआवजा मिलेगा। बता दें इस मुआवजे को 24 सालों बाद बढ़ाया गया है। वहीं परिवहन मंत्रालय ने लोगों को अधिक से अधिक मुआवजा मिले इसके लिए मामले को मोटर एक्सिडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल के पास ले जाने का विकल्प दिया है। 

विज्ञापन


नए मानदंडों के मुताबिक यह नियम जल्द ही लागू होगा। यदि कोई घटना में मारा जाता है तो उसके परिवार को 5 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। वहीं दिव्यांगों के लिए 50,000 से 5 लाख रुपये तय किए गए हैं। इसके साथ ही इस मुआवजा राशि में हर साल 5 फीसदी बढ़ोतरी का भी प्रावधान होगा। यह फैसला बड़ी संख्या में पीड़ितों को त्वरित राहत देगा। आंकड़ों की मानें तो हर साल देश में करीब 1.5 लाख लोग सड़क दुर्घटना में अपनी जान गंवाते हैं। वहीं 5 लाख लोग हर साल घायल होते हैं। 

इसके अलावा मुआवजे की राशि में मोटर मालिक के लिए थर्ड पार्टी प्रीमियम में बढ़ोतरी को भी शामिल किया गया है। मौजूदा समय में मोटर वाहन अधिनियम के तहत मौत होने पर 50,000 रुपये की राशि दी जाती है। साथ ही नो-फॉल्ट देयता मानदंड के अनुसार स्थायी अक्षमता के लिए 25,000 रुपये की राशि प्रदान की जाती है। जहां पीड़ित को मोटर वाहन चालक की लापरवाही साबित करने की जरूरत नहीं होती। यह बीमा कंपनियों पर बाध्यकारी होता है। हालांकि कई पीड़ित इसे स्वीकार नहीं करते हैं जिस कारण सारे मामले मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (MACT) के पास चले जाते हैं। 
विज्ञापन


इस प्रकार के मामलों में मुआवजा भुगतान अधिनियम के अंतर्गत अनुसूचि-2 के तहत दिया जाता है। जो एक संरचित सूत्र पर आधारित होता है। इसमें पीड़ित पर आश्रित लोगों की उम्र, आय और संख्या को ध्यान में रखा जाता है। इसके अलावा इसमें पीड़ित पक्ष को ड्राइवर की गलती भी साबित करनी पड़ती है। वहीं मोटर वाहन अधिनियम (1998) में प्रावधान है कि इस संरचना में समय-समय पर बदलाव किया जाए जिसमें कॉस्ट ऑफ लिंविंग (जीवन यापन खर्च) को ध्यान में रखा जाना आवश्यक है। लेकिन इसमें आज तक किसी प्रकार का कोई बदलाव नहीं हुआ। 

मुआवजा तय करने के लिए परिवहन मंत्रालय ने मोटर वाहन अधिनियम के शेड्यूल-2 के तहत 2011-12 से लेकर 2015-16 के बीच मौत पर दी गई औसतन राशि पर विचार किया था। इस दौरान 3 लाख से 4.9 लाख रुपये पीड़ित परिवार को दिए गए। एक अधिकारी ने बताया कि 'ज्यादातर मामलों में मुकदमे को घटाने के लिए यह फैसला किया गया है। जो लोग ज्यादा मुआवजा चाहते हैं, वे कानूनी रास्ता अपना सकते हैं, जिसमें समय लगेगा।' 

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें