केंद्र सरकार ने सोमवार को उग्रवादी गुट नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड (खापलांग) पर प्रतिबंध को बढ़ा दिया। सरकार ने कहा कि नगा उग्रवादी गुट हिंसा, जबरन वसूली और पृथकतावादी गतिविधियों में लगा हुआ है। दशकों से यह संगठन प्रतिबंधित है और हर पांच साल में प्रतिबंध बढ़ा दिया जाता है। 2017 में म्यांमार के नगा एसएस खापलांग की मौत के बाद इस गुट को उनके दो करीब चला रहे हैं।
केंद्रीय गृहमंत्रालय ने अधिसूचना में कहा कि उग्रवादी गुट 28 सितंबर 2015 के बाद से 104 हिंसक घटनाओं में शामिल रहा है। इसके चलते सात सुरक्षाकर्मियों और छह नागरिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी। साथ ही इस गुट ने 75 नागरिकों को भी अगवा किया। गुट गैरकानूनी और हिंसक गतिविधियों में शामिल रहा और इसने केंद्र सरकार तथा नगालैंड, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश सरकारों के अधिकारों को चुनौती दी।
साथ ही लोगों के बीच आतंक और भय फैलाया। यह गुट अन्य गैरकानूनी संगठनों जैसे यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असोम या उल्फा, मणिपुर के मैत्रेयी आर्गनाइजेशन से जुड़ा हुआ है। साथ ही यह फिरौती के लिए अपहरण, कारोबारियों, सरकारी अधिकारियों और आम नागरिकों से जबरन वसूली जैसी गतिविधियों में भी शामिल है।