सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस शरद अरविंद बोबडे ने सोमवार को कहा कि कोरोना वायरस महामारी को सरकार ही बेहतर तरीके से ‘हैंडल’ कर सकती है। उन्होंने इस आरोप को बेबुनियाद बताया कि सुप्रीम कोर्ट सरकार के पदचिह्नों पर चल रही है और कोरोना वायरस को लेकर दायर जनहित याचिकाओं पर सही तरीके से विचार नहीं कर रही है।
सीजेआई ने कहा कि मैन, मनी और मैटेरियल, इन तीनों का इस्तेमाल कैसे किया जाए और क्या प्राथमिकताएं होनी चाहिए, यह तय करना सरकार का काम है। लोकतंत्र के तीनों अंगों संसद, सरकार और न्यायपालिका को कोरोना के प्रकोप से बाहर निकलने के लिए मिलजुलकर काम करने की जरूरत है। ‘लोगों के अधिकारों के संरक्षण में न्यायपालिका की भूमिका’ पर उन्होंने कहा कि हम हरसंभव कोशिश करते हैं और करते रहेंगे। हमसे जितना बेहतर हो सकेगा, हम जरूर करेंगे। कोरोना से विषम परिस्थिति में सभी लोगों को आश्रय, भोजन और दवाइयों की सुविधाएं सुनिश्चित करने की कोशिश की है लेकिन हम फील्ड में नहीं है, यह भी एक सच्चाई है।
अधिकारों का उल्लंघन होने पर देंगे दखल:
सीजेआई ने कहा, जब कभी भी अधिकारों का उल्लंघन होगा तो न्यायपालिका द्वारा नि:संदेह हस्तक्षेप किया जाएगा न कि हर मामले में और हर समय। सरकार लोगों के जीवन को खतरे में नहीं डाल सकती।
सभी जज काम कर रहे हैं न कि आराम:
सरकार के पदचिह्नों पर चलने के आरोप पर उन्होंने कहा कि कोरोना से संबंधित सभी मामलों में कोर्ट ने सरकार से यह पूछा है कि उसने इस संबंध में क्या कदम उठाए हैं ताकि वह आश्वस्त हो सके। यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के सभी जज काम कर रहे हैं न कि आराम। हम कैलेंडर के हिसाब से 210 दिन काम कर रहे हैं।