अजीम शायर मिर्ज़ा ग़ालिब का आज जन्मदिन है। इस मौके पर गूगल ने उन्हें डूडल बनाकर सम्मान दिया है। गालिब का जन्म 27 दिसंबर 1796 को आगरा में हुआ था। मिर्ज़ा ग़ालिब के बारे में खास बात ये है कि उनकी शादी 13 साल की उम्र में ही कर दी गई थी।
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शायर मिर्ज़ा ग़ालिब ने अपने पिता और चाचा को बचपन में ही खो दिया था। जिसके बाद उन्होंने अपना पूरा जीवन अपने चाचा के निधन के बाद मिलने वाली उनकी पेंशन से किया। उन्होंने 11 साल की उम्र में ही गद्य और पद्य लिखने शुरू कर दिये थे। शेरों-शायरी की दुनिया में मिर्ज़ा ग़ालिब का नाम आज भी एक अलग पहचान रखता है।
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मिर्ज़ा ग़ालिब उर्दू और फारसी भाषा के महान शायर थे। इतने सालों के बाद भी गालिब के चाहने वालों की कमी नहीं है। उन्हें भारत और पाकिस्तान में भी एक महत्वपूर्ण कवि के रूप में जाना जाता है। मशहूर शायर मिर्ज़ा ग़ालिब को दबीर-उल-मुल्क और नज़्म-उद-दौला का खिताब मिला था।
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मिर्ज़ा ग़ालिब आखिरी मुगल शासक बहादुर शाह जफर के दरबारी कवि भी थे। अपनी शायरी में वो गालिब नाम का जिक्र जरूर करते थे। उन्होंने कहा था कि-
“हैं और भी दुनिया में सुखन्वर बहुत अच्छे
कहते हैं कि गालिब का है अन्दाज-ए बयां और”