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देश की पहली महिला बैरिस्टर कॉर्नेलिया सोराबजी का गूगल ने बनाया डूडल

Wed, 15 Nov 2017 10:01 AM IST
amarujala.com: presented by-पूजा मेहरोत्रा
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Cornelia Sorabji - फोटो : Google Doodle
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गूगल ने अपना डूडल आज देश की पहली महिला बैरिस्टर कोर्नेलिया सोराबजी को समर्पित किया है। कॉर्नेलिया को न केवल देश की पहली महिला बैरिस्टर होने का गर्व प्राप्त है बल्कि वो देश की पहली महिला हैं  जिन्होंने बॉंबे यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट किया और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में लॉ की डिग्री हासिल की। गूगल बुधवार को सोराबजी का 151 वां जन्मदिन मना रहा है।
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 कोर्नेलिया देश की पहली महिला हैं जिन्होंने देश में महिलाओं के लिए एक प्रोफेशन के रूप में कानून का दरवाजा खोला। नासिक की पारसी परिवार में जन्मी कार्नेलिया का जन्म 1866 में 15 नवंबर को हुआ था। समाज सुधारक के रूप में सोराबजी ने महिलाओं के लिए कई दरवाजे खोले साथ ही महिलाओं और नाबालिगों के अधिकारों के लिए समाज में नए सुधार करवाए।

सोशल रिफॉर्म कार्नेलिया के खून में था, उनकी मां फ्रांसिना फोर्ड महिला शिक्षा की पक्षधर थीं, उन्होंने पुणे में लड़कियों के लिए कई स्कूल भी खोले। कॉर्नेलिया कुल छह भाई बहन थे उनमें वो अकेली बहन थीं। 
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कोर्ट में प्रैक्टिस करने की अनुमति नहीं दी गई

Cornelia Sorabji - फोटो : Google Doodle
वैसे तो कॉर्नेलिया की शुरुआती शिक्षा दीक्षा घर में ही हुई थी,जब वो ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी पहुंची तो उनकी पढ़ाई का काफी विरोध किया गया था लेकिन उनके और उनकी पढ़ाई के समर्थक भी कई थे। उनकी पढ़ाई के लिए ब्रिटेन के फ्लोंरेस नाइटेंगल ने भी फंड दिया था।1892 में उन्होंने  ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के समरविले कॉलेज से कानून की पढ़ाई पूरी की। 

सोराबजी के लिए विरोध का स्वर इतना प्रखर था कि उन्हें कोर्ट में प्रैक्टिस करने की अनुमति नहीं दी गई क्योंकि उस समय भारत में महिला बैरिस्टर को कोर्ट में प्रैक्टिस करने की अनुमति नहीं थी। फिर उन्होंने अपने अधिकार के लिए लंबी लड़ाई लड़ी और 1904 में बंगाल कोर्ट में  लेडी असिस्टेंट के रुप में ज्वानइ किया और फिर उन्होंने बिहार, बंगाल, ओडिशा और आसाम में काम शुरू किया।

20 साल के अंदर उन्होंने कॉर्नेलिया देश में महिलाओं की आवाज बन चुकी थीं और उन्होंने इस दौरान 600 से अधिक महिलाओं को उनके अधिकार दिलाने में मदद की। वहीं 1924 में उन्होंने कोलकाता और ब्रिटेन में प्रैक्टिस शुरू की।   कानून के अलावा उन्होंने कई किताबें, शॉर्ट स्टोरीज और आर्टिकल भी लिखा साथ ही उन्होंने ऑटोबायोग्राफी बिटविन द ट्विलाइट लिखा। 

 
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