सुप्रीम कोर्ट ने जजों के नाम पर रिश्वतखोरी के आरोप को अपमानजनक बताया है। मामले की जांच एसआईटी से कराने की मांग वाली याचिका खारिज करते हुए शीर्ष अदालत ने यह भी साफ कर दिया कि किस मामले की सुनवाई कौन पीठ करेगी, यह तय करने का अधिकार सिर्फ चीफ जस्टिस के पास है चाहे आरोप उनके खिलाफ ही क्यों न हो। हालांकि पीठ ने कहा है कि कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है, फिर भी यह बार और पीठ की जिम्मेदारी है कि वह न्यायिक व्यवस्था की गरिमा का ध्यान रखें। न्यायपालिका को जो नुकसान पहुंचना था, वह तो पहुंच चुका है अब इसकी गरिमा और प्रतिष्ठा के लिए हम सभी एकजुट होकर काम करें।
CBI की दया पर नहीं छोड़ी जा सकती न्यायपालिका की आजादी: सुप्रीम कोर्ट
जस्टिस आरके अग्रवाल की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने मंगलवार को अपने फैसले में कहा कि इस तरह की याचिका से न्यायपालिका की गरिमा को नुकसान पहुंचा है और लोग बेवजह न्यायपालिका की निष्ठा को संदेह की नजर से देख रहे हैं। पीठ ने याचिकाकर्ता वकील कामिनी जायसवाल और वकील प्रशांत भूषण के प्रयासों को ‘फोरम शॉपिंग’ करार दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि यह न्यायालय की अवमानना का मामला है, लेकिन यह उम्मीद करते हुए कि जायसवाल और भूषण भविष्य में इस तरह की याचिकाएं दायर नहीं करेंगे, पीठ ने उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने से इनकार कर दिया।