केंद्र सरकार द्वारा लोकसभा और विधानसभा में एससी/एसटी आरक्षण को 10 साल तक और बढ़ाने को हरी झंडी दिए जाने के बाद राज्य सरकारों ने भी इसे समर्थन देना शुरू कर दिया है। गोवा विधानसभा ने मंगलवार को विशेष सत्र में इसका समर्थन किया जबकि मध्य प्रदेश में आगामी 16 जनवरी को ऐसा होगा।
गोवा में स्पीकर राजेश पटनेकर ने विपक्षी दलों के सदन की कार्यवाही स्थगित करने के नोटिस को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि राज्यपाल ने एक दिन के लिए सत्र बुलाने के निर्देश दिए हैं ताकि विधानमंडल में एससी/एसटी आरक्षण को 10 साल के विस्तार देने के बिल का समर्थन किया जा सके। मुख्यमंत्री ने संविधान संशोधन बिल के प्रस्ताव को सदन के पटल पर रखा, जिसे सर्वसम्मति से पास कर दिया गया।
हालांकि पर्यटन मंत्री मनोहर अजगांवकर समेत कुछ विधायक इस पर चर्चा चाहते थे, लेकिन स्पीकर ने स्पष्ट कर दिया कि सदन सिर्फ इसे बहाल करने के लिए बुलाया गया है।
मध्य प्रदेश में 16 जनवरी को विशेष सत्र
मध्य प्रदेश में इसे लागू करने के लिए 16 जनवरी को विशेष सत्र बुलाया गया है। संविधान संशोधन बिल लोकसभा और राज्यसभा में पहले ही 10 और 12 दिसंबर को पारित हो चुका है। इसके बाद इसे सभी राज्यों को समर्थन के लिए भेजा गया था। इसे लागू करने से पहले कम से कम 50 फीसदी राज्य सरकारों का समर्थन जरूरी है।
मध्य प्रदेश विधानसभा के प्रधान सचिव एपी सिंह ने बताया, 'लोकसभा और विधानसभा में आरक्षण संबंधी विधेयक पर समर्थन जुटाने के लिए 16 और 17 जनवरी को विशेष सत्र बुलाया गया है।'
मध्य प्रदेश में 29 लोकसभा सीटों में से छह एसटी और 4 एससी के लिए आरक्षित हैं। इसी तरह 230 विधानसभा सीटों में 47 आरक्षित हैं।