Goa Governor Sreedharan Pillai
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गोवा के राज्यपाल पी एस श्रीधरन पिल्लई ने बुधवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की उपस्थिति में गोवा विधानसभा के एक विशेष सत्र को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने केरल विधानसभा द्वारा हाल ही में अपनाए गए उस प्रस्ताव पर सवाल उठाते दिखे, जिसमें केंद्र सरकार से देश में समान नागरिक संहिता लागू करने से परहेज करने का अनुरोध करने का निर्णय लिया गया था। हालांकि अपने संबोधन में उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने भी समान नागरिक संहिता को लागू करने के लिए गोवा की तारीफ की है। अन्य राज्यों में बेटी को अपने पिता की संपत्ति में एक तिहाई हिस्सा पाने का अधिकार है जबकि बेटे को दो तिहाई हिस्सा मिलता है। इसमें महिला-पुरूष की बराबरी कहां है? लिंग के आधार पर भेदभाव है जिसे संविधान में अनुमति नहीं दी गयी है।
किसी का नाम लिये बगैर पिल्लई ने कहा कि हाल में एक विधानसभा ने एक प्रस्ताव पारित किया जो उसका अधिकार है और सवाल करते हुए कहा कि मैं उसका नाम नहीं ले रहा हूं। यदि मैं उसका जिक्र करता हूं तो यह मेरे लिए भी शर्मनाक बात होगी क्योंकि मैं उसी राज्य से हूं। निश्चित ही, वे अपनी राय व्यक्त कर सकते हैं। हर व्यक्ति को अनुच्छेद 44 समेत संविधान के किसी प्रावधान एवं उस खास विषय पर अपनी राय व्यक्त करने का अधिकार है, मैं उसके विरूद्ध नहीं हूं। लेकिन क्या कोई विधानसभा प्रस्ताव पारित कर यूसीसी को ‘ना’ कह सकती है।
गोवा की तीन दिवसीय यात्रा पर आयीं राष्ट्रपति मुर्मू ने इस तटीय प्रदेश में ‘समान नागरिक संहिता’ के लागू होने की मंगलवार को तारीफ की थी और कहा था कि यह इस राज्य के लिए गर्व का विषय है तथा देश के लिए एक अच्छा उदाहरण है।
राज्यपाल ने यह भी कहा कि लोकतंत्र के तीनों स्तंभों को लक्ष्मण रेखा का पालन करते रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि बतौर राज्यपाल, मैं उसके बारे में कुछ नहीं कहना चाहता। क्या कोई अंग हमारे पूर्वजों द्वारा बनाये गये संविधान में प्रस्तावित की गयी लक्ष्मण रेखा का उल्लंघन कर सकता है।