आम तौर पर लोग नाइजीरियाई लोगों से नाराज रहते हैं क्योंकि उनका बर्ताव कुछ अलग होता:लक्ष्मीकांत पारसेकर
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गोवा में एक बार फिर सत्ता की चाभी छोटे दलों और निर्दलीय विधायकों के हाथ में जाती दिख रही है। 40 सीटों वाली विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 21 विधायकों के समर्थन की आवश्यक्ता है। फिलहाल कांग्रेस और भाजपा के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है। अब तक घोषित 33 सीटों के परिणाम में भाजपा और कांग्रेस ने 12-12 सीटें जीतने में सफलता हासिल की है। 38 सीटों के रुझान में बाकी बची 5 सीटों में कांग्रेस और भाजपा 2-2 सीटों पर बढ़त बनाए हुए हैं। जबकि एक सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी आगे चल रहा है।
सत्ता की चाभी नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी(एनसीपी), महाराष्ट्रवादी गौमंतक पार्टी (एमजीपी), गोवा फॉर्वर्ड पार्टी(जीएफपी) और निर्दलीय विधायकों के हाथ में जाती दिख रही है। खबर लिखे जाने तक घोषित परिणामों में एमजीपी 3, जीएफपी 3, एनसीपी 1 और निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत हासिल की है। भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के पास अन्य दलों के साथ गठबंधन करने के अलावा और कोई विकल्प शेष बचता नहीं दिख रहा है।
भाजपा को गोवा में सबसे बड़ा झटका तब लगा जब मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत पारसेकर को हार का सामना करना पड़ा। उन्हें मंद्रेम सीट पर कांग्रेस के दयानंद रघुनाथ सोपते ने मात दी।
आम आदमी पार्टी के हाथ गोवा में बड़ी निराशा लगी है। उनका कोई भी उम्मीदवार कांग्रेस भाजपा या अन्य दलों को टक्कर नहीं दे सका।