2012 में चुनाव जीतकर गोवा की सत्ता में आने वाली भाजपा के लिए आगामी विधानसभा चुनाव बेहद कठिन होने वाला है। जहां एक ओर आम आदमी पार्टी गोवा चुनाव में पहली बार हिस्सा ले रही है, वहीं पिछले चुनाव में भाजपा के साथ चुनाव लड़ने वाली महाराष्ट्र गोमांतक पार्टी ने अलग होकर मैदान में उतरने का फैसला किया है। महाराष्ट्र गोमांतक पार्टी, आरएसएस के बागी नेता सुभाष वेलिंगकर की नई पार्टी गोवा सुरक्षा मंच और शिवसेना के साथ मिलकर भाजपा के खिलाफ लड़ रही है। भाजपा के लिए यह चुनाव गोवा में अपनी साख बनाए रखने के लिए आवश्यक है। आइए आप को बताते हैं कुछ ऐसे मुद्दे जो गोवा चुनाव के केंद्र में रह सकते हैं।
अवैध खनन
गोवा चुनाव में खनन सबसे बड़ा मुद्दा रहेगा। गोवा भारत में कच्चे लोहे का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। खनन गोवा को आर्थिक रूप से मजबूत बनाता है। खनन के चलते गोवा के नागरिकों को रोजगार मिलता है। हालांकि खनन के चलते पर्यावरण को हो रहे नुकसान को लेकर खूब प्रदर्शन हुए। जिसके बाद सितंबर, 2012 में सरकार द्वारा सभी खनन बंद कर दिये गए थे। सरकार ने खनन की जांच के लिए एक कमिशन का गठन भी किया था। कमीशन ने चौंकाने वाले रिपोर्ट दी। अवैध खनन के कारण सरकारी खजाने से 34,935 करोड़ रुपये की निकासी की बात कही गई थी। अब राजनीतिक पार्टियां, पर्यावरण संरक्षण और खनन व्यापारियों के बीच का कोई रास्ता निकालने का प्रयास कर सकती हैं।
कसीनो
पर्यटन का केंद्र होने की वजह से गोवा में दर्जनों कसीनो चल रहे हैं। 2012 के चुनाव में कसीनो मुद्दा बने थे। भाजपा में अपने चुनावी घोषणा पत्र में सभी कसीनो को बंद करने की बात कही थी। हालांकि चुनाव के बाद भाजपा इस मुद्दें को टालती रही। हाल ही में भाजपा पर कसीनो मालिकों का पक्ष लेने का आरोप लगता रहै है। भाजपा की इस छवी का सीधा फायदा अन्य पार्टियों को मिल सकता है , जिनमें आम आदमी पार्टी प्रमुख है।